झारखंड : झारखंड हाईकोर्ट ने एक बार फिर राज्य की पुलिस व्यवस्था को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। थानों में सीसीटीवी व्यवस्था की लापरवाही पर नाराज़गी जाहिर करते हुए कोर्ट ने सरकार को साफ निर्देश दिया है कि दिसंबर के अंत तक सभी आवश्यक प्रक्रियाएँ पूरी कर ली जाएँ और राज्य के सभी 334 थानों में सीसीटीवी कैमरे हर हाल में लगाए जाएँ। धनबाद के एक मामले में सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित न होने के बाद अदालत ने इसे गंभीर चूक मानते हुए शासन-प्रशासन को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। पहले की सुनवाई में हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी और आईटी विभाग की सचिव को सशरीर उपस्थित होने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सभी अधिकारी मंगलवार को अदालत में पेश हुए।
हाईकोर्ट ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि 31 दिसंबर 2025 तक राज्य के सभी थानों में सीसीटीवी लगाने के लिए DPR (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) और टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। इसके बाद जल्द से जल्द सभी 334 थानों में सीसीटीवी कैमरा लगाया जाए। अदालत ने कहा कि पूरा अनुपालन 5 जनवरी तक सुनिश्चित किया जाए।
यह मामला पश्चिम बंगाल के रहने वाले शौभिक बनर्जी की शिकायत से जुड़ा है। उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि वे धनबाद कोर्ट में चेक बाउंस मामले में बेल लेने आए थे, लेकिन धनबाद पुलिस ने उन्हें दो दिनों तक थाना में अवैध रूप से बैठाए रखा, और उन पर दबाव बनाकर दूसरे पक्ष की मदद की गई। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि पूरी घटना धनबाद के बैंक मोड़ थाने के सीसीटीवी में रिकॉर्ड है। लेकिन जब अदालत ने सीसीटीवी फुटेज प्रस्तुत करने को कहा, तो पुलिस ने बताया कि सीसीटीवी का केवल दो दिनों का ही बैकअप उपलब्ध है।
Also Read : प्रशांत किशोर ने बिहार चुनाव में मिली हार की ली जिम्मेदारी, उपवास रखने का ऐलान
अदालत ने इस पर हैरानी जताते हुए कहा कि धनबाद जैसा बड़ा शहर, जहां अपराध का ग्राफ काफी ऊंचा है, वहां पुलिस के पास सीसीटीवी का रिकॉर्ड सुरक्षित न होना आश्चर्यजनक है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि थानों में सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी शिकायत या जांच में सही तथ्य सामने आ सकें।


