पैरेंटिंग/हेल्थ: आजकल 5-6 साल के बच्चे भी मोबाइल, टैबलेट और स्मार्ट TV चलाने में एक्सपर्ट हो गए हैं। वीडियो देखना, गेम खेलना, सोशल मीडिया स्क्रॉल करना – सब आसान है। लेकिन इंटरनेट चलाना और इंटरनेट पर सेफ रहना दो अलग चीजें हैं।
Highlights:
इसलिए पैरेंट्स का काम है कि स्मार्टफोन देने से पहले बच्चों को Digital Safety की बेसिक बातें जरूर समझाएं।
-
इंटरनेट पर हर कोई दोस्त नहीं होता
बच्चों को सबसे पहले ये समझाएं कि ऑनलाइन मिलने वाला हर शख्स सच नहीं बोलता। कई लोग खुद को दोस्त, गेमर या फेमस यूट्यूबर बताकर बात करना चाहते हैं।
रूल: अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट Accept न करें। चैट में अपना नाम, स्कूल, घर का पता, फोन नंबर जैसी पर्सनल बातें शेयर न करें।
-
किसी भी लिंक पर क्लिक मत करो
ऑनलाइन दुनिया में ‘Free Gift’, ‘iPhone जीतो’, ‘1000 रुपये का रिचार्ज’ जैसे झांसे बहुत हैं। बच्चे लालच में फंस जाते हैं।
रूल: कोई भी अनजान लिंक, फाइल या QR Code बिना पूछे न खोलें, न डाउनलोड करें, न स्कैन करें। कुछ समझ न आए तो तुरंत मम्मी-पापा से पूछें।
-
सोचकर ही फोटो-वीडियो पोस्ट करो
बच्चे सोचते हैं डिलीट कर देने से फोटो हमेशा के लिए हट जाती है। लेकिन स्क्रीनशॉट और सेव का ऑप्शन हमेशा होता है।
रूल: इंटरनेट पर वही फोटो/वीडियो डालो जिसे आप 2 साल बाद भी सबको दिखा सको। एक बार पोस्ट हो गया तो वो परमानेंट हो सकता है।
-
अपनी पर्सनल जानकारी सीक्रेट रखो
नाम, स्कूल का नाम, घर का पता, फोन नंबर, लाइव लोकेशन – ये जानकारी हैकर और साइबर ठगों के लिए खजाना है।
रूल: किसी गेम, ऐप या वेबसाइट पर ये डिटेल डालने से पहले पैरेंट्स से परमिशन लें।
-
डर लगे तो तुरंत बताओ
अगर कोई मैसेज, फोटो या वीडियो बच्चे को डराए, परेशान करे या ‘सीक्रेट रखने’ को कहे, तो वो तुरंत बड़े को बताएं।
रूल: पैरेंट्स बच्चों को ये भरोसा दिलाएं कि सच बताने पर डांट नहीं पड़ेगी। छुपाने से प्रॉब्लम बढ़ती है।
पैरेंट्स के लिए सबसे जरूरी बात
Cyber Safety एक दिन का लेक्चर नहीं है। बच्चों से रोज खुलकर बात करें। उनके साथ बैठकर YouTube, गेम्स और ऐप्स चेक करें। जब पैरेंट्स खुद सेफ इंटरनेट यूज करना सिखाएंगे, तभी बच्चे ऑनलाइन दुनिया में सेफ रह पाएंगे।
इसे भी पढ़े: http://बिहार में पंकज त्रिपाठी के भाई बिजेंद्र पर जानलेवा हमला, धारदार हथियार से किया वार, हालत गंभीर




