बांग्लादेश : बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री हसीना शेख और पूर्व गृह मंत्री असदुज्ज़मान खान कमाल को विशेष ट्रिब्यूनल ने 5 गंभीर आरोपों में से 3 के सिद्ध होने पर फांसी की सज़ा मुकर्रर कर दी। अब सज़ा सोमवार को दी गई , और शेख हसीना 2024 में हुए प्रदर्शन के बाद से भारत में ही शरण लिए हुए हैं। तो ऐसे में भारत ने सोमवार को कहा कि उसने बांग्लादेश के ढाका स्थित अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) के उस्ताद प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ दिए गए फैसले पर औपचारिक रूप से संज्ञान लिया है उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी है कि बांग्लादेश के ट्राइब्यूनल ने शेख हसीना को लेकर फैसला सुनाया है। यह भी जोड़ा कि वह बांग्लादेश के लोगों के सर्वोत्तम हितों के प्रति प्रतिबद्ध है।
Highlights:
बंगलादेश ने प्रत्यर्पण की औपचारिक मांग दोहराई
भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा की एक करीबी पड़ोसी के रूप में, भारत बांग्लादेश के लोगों के सर्वोत्तम हितों के प्रति प्रतिबद्ध है, जिसमें शांति, लोकतंत्र, समावेशन और स्थिरता शामिल है। हम इस लक्ष्य की दिशा में सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक रूप से जुड़ते रहेंगे और ज़रूरत पड़ने पर हमेशा साथ खड़ा रहेंगे। इससे पहले, ढाका ने नई दिल्ली से तत्काल शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्ज़मान खान कमाल को वापस करने का अनुरोध किया था, जब अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने दोनों को जुलाई में छात्र विरोध प्रदर्शनों पर हुए घातक दमन में कथित भूमिका के लिए मौत की सज़ा सुनाई थी।
ढाका ने बार-बार यह इंगित किया है कि हसीना पिछले वर्ष के अशांति के बाद देश छोड़कर भारत में रह रही हैं। द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि का हवाला देते हुए, बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि फैसले ने पूर्व नेता को “मानवता के खिलाफ अपराधों” का दोषी पाया है, और उन्हें बांग्लादेश वापिस भेजा जाए। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने यहां तक चेतावनी दी कि किसी भी देश द्वारा हसीना को शरण देना “अत्यंत अप्रिय कार्य और न्याय की अवहेलना” होगा।
बांग्लादेश ने दिसंबर 2024 में ही औपचारिक रूप से हसीना को डिपोर्ट करने का अनुरोध कर दिया था, जो भारत के विदेश सचिव की पड़ोसी देश की यात्रा के दो सप्ताह बाद आया था। 2013 में दोनों देशों के बीच हस्ताक्षरित मौजूदा प्रत्यर्पण संधि के तहत, निर्वासन में रह रहे किसी नेता को डिपोर्ट करने का अनुरोध अगर”राजनीतिक रूप से प्रेरित” माना जाए तो उसे खारिज किया जा सकता है , और ये एक शब्द जिसका हसीना ने देश छोड़ने के बाद से बार-बार इस्तेमाल किया है। उन्होंने बार बार कहा है कि ये सिर्फ एक राजनीतिक साजिश है जो मेरे खिलाफ़ की जा रही है।
अब संधि के अनुच्छेद 6 के अनुसार, जिसमें प्रत्यर्पण अनुरोध को अस्वीकार करने के सभी आधार सूचीबद्ध हैं, यह भी निर्दिष्ट है कि यदि आरोप bona fide (सच्ची नीयत) से नहीं लगाए गए हैं या “न्याय के हित में सद्भावना से नहीं किए गए हैं,” तो भी अनुरोध को अस्वीकार किया जा सकता है। यानी देश चाहे तो डिपोर्ट नहीं भी कर सकता है। मतलब अगर बांग्लादेश की अदालत का फैसला राजनीतिक बदले जैसा दिखता है या सत्ता परिवर्तन से उपजा लगता है, तो भारत कानूनी रूप से प्रत्यर्पण से इनकार कर सकता है. इसका आधार साफ है कि भारत यह देखेगा कि शेख हसीना को निष्पक्ष सुनवाई मिलेगी या नहीं, और क्या उनकी जान को खतरा है. यदि खतरे की आशंका सामने आती है, भारत की अदालतें प्रत्यर्पण रोक सकती हैं.
भारत में राजनीतिक शरण की संभावना
इसके अलावा, शेख हसीना चाहें तो भारत में राजनीतिक शरण (Political Asylum) का दावा कर सकती हैं. यदि भारत सरकार शरण मंजूर कर लेती है, तो ऐसी स्थिति में किसी को भी वापस भेजना अंतरराष्ट्रीय शरणालय नियमों के खिलाफ होगा. भारत ने पहले भी दलाई लामा, तमाम अफगान नेताओं, श्रीलंका और पाकिस्तान के अनेक राजनीतिक चेहरों को शरण दी है।
अब इस पर बांग्लादेश ने कहा कि भारत “दोनों दोषी व्यक्तियों को तुरंत सौंपे,” और प्रत्यर्पण को संधि के तहत “अनिवार्य कर्तव्य” बताया। अधिकारियों ने जोड़ा कि वे उम्मीद करते हैं कि भारत आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अपने कानूनी दायित्वों का सम्मान करेगा। और दोनों आरोपियों यानि पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्ज़मान खान कमाल को वापिस बांग्लादेश भेजे। वहीं भारत का बयान ये रहा, कि एक करीबी पड़ोसी के रूप में, वह बांग्लादेश के लोगों के सर्वोत्तम हितों यानी शांति, लोकतंत्र, समावेशन और स्थिरता के प्रति प्रतिबद्ध है और इस लक्ष्य की दिशा में सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक रूप से जुड़ता रहेगा।


