रांची: JPSC परीक्षा अनियमितता मामले में पिछले महीने की 10 तारीख को गिरफ्तार जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते की जमानत याचिका सीआईडी कोर्ट ने खारिज़ कर दी है. सीआईडी की विशेष अदालत ने इससे पहले पूर्व में इस मामले में सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था. सुनवाई के दौरान सीआईडी की ओर से बचाव पक्ष की दलीलों का पुरजोर विरोध किया था. इस मामले में सीआईडी ने करीब 1000 पन्नों की विस्तृत केस डायरी सौंपी, जिसमें आरोपियों के खिलाफ कई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए गए.
इसे भी पढ़ें: सुदेश महतो ने उठाये सवाल, पूछा – क्या मुख्यमंत्री हो गए हैं अप्रासंगिक? क्या लोकतांत्रिक व्यवस्थाएँ ध्वस्त हो गई हैं?
सुनवाई के दौरान सीआईडी की ओर से कोर्ट में बताया गया कि मामले में आरोपी पर परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसियों से कमीशन के तौर पर मोटी रकम लेने के गंभीर आरोप हैं. ऐसे में जमानत देने से जांच प्रभावित हो सकती है. CID ने JPSC परीक्षा में हुई अनियमितताओं को लेकर कांड संख्या 16/2026 दर्ज की है. इस मामले में अब तक पूर्व अध्यक्ष समेत 24 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है.
बता दें कि एल ख्यांग्ते ने बीते 21 जुलाई को तब अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जब सीआईडी ने जेपीएससी कार्यालय में छापेमारी कर लगभग एक दर्जन लोगों को हिरासत में लिया था. बाद में इस मामले में पहले 23 जुलाई को उनके सरकारी आवास पर कई घंटों तक सीआईडी ने छापेमारी की थी तो वहीं बाद में सीआईडी ने उनसे चार बार पूछताछ की थी. बाद में 10 अगस्त को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था.
इसके अलावा निलंबिच उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता और अभय तिवारी सहित कई अन्य आरोपी भी न्यायिक हिरासत में हैं. जांच में यह भी सामने आया है कि अभय तिवारी और उनके परिवार के कई सदस्यों को JPSC की विभिन्न परीक्षाओं के माध्यम से नियुक्तियां मिली थीं. CID कोर्ट से बेल रिजेक्ट होने के बाद अब खियांग्ते को जमानत के लिए हाईकोर्ट की शरण लेनी होगी.

