रांची: सुप्रीम कोर्ट में झारखंड के DGP की नियुक्ति से जुड़े विवाद पर कल यानी मंगलवार को सुनवाई होगी. यह मामला चर्चित प्रकाश सिंह मामले से जुड़ा हुआ है. पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने झारखंड सरकार द्वारा पुलिस अधिनियम 1861 के तहत बनाई गई चयन और नियुक्ति नियम 2025 पर गंभीर सवाल उठाए हैं. संशोधित नियमों के तहत ऐसे अधिकारियों को भी पुलिस महानिदेशक (DGP) पद के लिए पात्र माना गया है जिनकी सेवानिवृत्ति में छह महीने से भी कम समय बचा है और इसके लिए पूर्वव्यापी सेवा का लाभ दिया गया है.
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सुप्रीम कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इसे प्रकाश सिंह मामले में तय किए गए दिशानिर्देशों के विपरीत माना है. अगर यह नियम रद्द होता है तो झारखंड की DGP तदाशा मिश्रा की नियुक्ति भी प्रभावित हो सकती है. इसे ध्यान में रखते हुए अदालत ने DGP तदाशा मिश्रा को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है. इसके साथ ही झारखंड सरकार को यह छूट दी गई है कि या तो वह इस विवादित नियम की समीक्षा करे या फिर अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करे.
इस बीच मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता और एमिकस क्यूरी राजू रामचंद्रन से इस नियम की वैधता पर सहायता करने का अनुरोध किया है. उन्हें अन्य राज्यों द्वारा DGP की नियुक्ति के लिए बनाए गए ऐसे ही कानूनों और नियमों की भी समीक्षा करने को कहा गया है. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को इस कार्य में एमिकस क्यूरी की सहायता करने का निर्देश दिया गया है और यूपीएससी की ओर से 26 अक्टूबर 2026 को लिखित दलीलें भी दाखिल कर दी गई हैं.

