रांची: झारखंड भाजपा के नेता व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि आज देश में अराजक तत्व सक्रिय हैं, देश को तोड़ने और बांटने की रणनीति के साथ काम कर रहे हैं, लेकिन उनकी मंशा को हम सबको ध्वस्त करना है। एमएमडीआर बिल पर उन्होंने कहा कि यह बिल झारखंड के लिए सबसे ज्यादा लाभदायक है। कांग्रेस के नेता सच को छुपा कर राज्य की जनता को गुमराह करने में लगे हैं। इस पर संसद में बहस नहीं होने दी। यह कानून पूरे देश के लिए मेजर मिनरल के लिए बनाया गया है। इससे झारखंड के हक और अधिकार में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं होगा।
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बाबूलाल मराण्डी ने कहा कि सेस के कारण झारखंड के कोयले और लोहे की कीमत में भारी इजाफा हुआ है, नतीजा झारखंड के खनिज की बिक्री नहीं हो पा रही है। झारखंड में कोयला और लोहे की अवैध खनन और खपत हो रहा है और राज्य के राजस्व की चोरी की जा रही है। उन्होंने कहा कि आज झारखंड की तुलना में ओडिसा और छत्तीसगढ़ में कम मात्रा में कोयला और लोहा होने के बावजूद भी वहां राजस्व की प्राप्ति अधिक है। इसकी चिंता वर्तमान सरकार को तनिक भी नहीं है। लेकिन केंद्र की नरेंद्र मोदी की सरकार झारखंड के हक और अधिकार की रक्षा करेंगे, उसे तनिक भी नुकसान नहीं होने देंगे।
अमित शाह को लिखा पत्र
इधर सोमवार को बाबूलाल मरांडी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर झारखंड के संथाल परगना क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बांग्लादेशी घुसपैठ, तीव्र जनसांख्यिकीय बदलाव, सरकारी व आदिवासी भूमि पर अवैध कब्जा कर निवास कर रहे बंगलादेशी घुसपैठियों मुस्लिमों की पहचान करते हुए डिटेंशन सेन्टर में तत्काल रखने और इनके निर्वासन के सम्बन्ध में उचित कदम उठाने की मांग की है।
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उन्होंने झारखंड के संथाल परगना क्षेत्र (विशेषकर पाकुड़, राजमहल, लिट्टीपाड़ा, महेशपुर एवं अन्य कई विधानसभा क्षेत्रों) में तेजी से बिगड़ते आंतरिक सुरक्षा परिदृश्य और अत्यंत चिंताजनक जनसांख्यिकीय बदलाव की ओर वर्ष 2019 से 2024 के बीच के आधिकारिक मतदाता आंकड़े को बिन्दुवार एवं विस्तृत रूप से जिक्र करते हुए बतलाया है कि कैसे एक विशेष समुदाय की आबादी आबादी तेजी से बढ़ रही है। बाबूलाल मरांडी ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थानीय जनजातीय अस्मिता के लिए गंभीर खतरा बताया है।
उन्होंने पत्र में संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (SPT Act) का खुला उल्लंघन करते हुए मुस्लिम समुदाय विशेष के द्वारा सरकारी जमीन, गोचर भूमि और गरीब आदिवासियों की पैतृक भूमि पर सुनियोजित तरीके से कब्जे किए जा रहे हैं। फर्जी वंशावली, जाली आधार कार्ड और अवैध जन्म प्रमाण पत्र बनाकर इन बाहरी घुसपैठियों को स्थापित किया जा रहा है। इसमें उन्होंने राज्य के सत्तारूढ़ दल और स्थानीय प्रशासन के एक वर्ग द्वारा अपने सुरक्षित ‘वोट बैंक‘ को सुरक्षित करने के लिए इन अवैध घुसपैठियों को खुला राजनीतिक संरक्षण देने का भी जिक्र किया है। उन्होंने गृह मंत्री से कई मांग भी किया है। ताकि इस पर विराम लगाया जा सके।

