Tuesday, September 15, 2026

लोकसभा में जारी हंगामा के बीच राहुल गांधी पर विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की चर्चा तेज

दिल्ली: बजट पर चर्चा के दौरान गुरुवार को लोकसभा में प्रश्नकाल हंगामे के कारण नहीं चल सका। सुबह 11 बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसद पोस्टर और प्लेकार्ड लेकर वेल में पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे। लगातार शोर-शराबे के बीच स्पीकर की कुर्सी पर मौजूद केपी तेन्नेटी ने महज सात मिनट बाद ही सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

किरेन रिजिजू का आरोप

इससे पहले संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो पोस्ट किया। उन्होंने 4 फरवरी को लोकसभा स्पीकर के चैंबर में हुए हंगामे का जिक्र करते हुए दावा किया कि विपक्षी सांसदों ने प्रियंका गांधी की मौजूदगी में अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। इस आरोप के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।

राहुल गांधी के खिलाफ

इधर, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि सरकार कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव ला सकती है। संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी द्वारा सरकार पर लगाए गए आरोपों के संदर्भ में प्रिविलेज मोशन लाने की बात कही है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक औपचारिक प्रस्ताव पेश नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसकी चर्चा तेज है।

क्या होता है विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव?

विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव वह प्रक्रिया है जिसके जरिए संसद या विधानसभा का कोई सदस्य यह मुद्दा उठा सकता है कि किसी अन्य सदस्य, मंत्री या अधिकारी ने सदन के विशेषाधिकारों का उल्लंघन किया है। संविधान के अनुच्छेद 105 में संसद सदस्यों के विशेषाधिकारों का उल्लेख है। इन विशेषाधिकारों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सांसद बिना किसी दबाव या भय के अपना काम कर सकें। इनमें शामिल हैं सदन में बोलने की स्वतंत्रता। सदन में दिए गए बयान पर अदालत में मुकदमा न चलना। सही और पूरी जानकारी प्राप्त करने का अधिकार। यदि इन अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो उसे विशेषाधिकार हनन माना जाता है।

प्रस्ताव की प्रक्रिया क्या है?

विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने के लिए संबंधित सदस्य लोकसभा या राज्यसभा के अध्यक्ष को नोटिस देता है। स्पीकर या सभापति यह तय करते हैं कि मामला गंभीर है या नहीं। यदि अनुमति मिलती है, तो मामला विशेषाधिकार समिति को भेजा जाता है। समिति जांच के बाद अपनी रिपोर्ट सदन में पेश करती है। इसके बाद सदन तय करता है कि क्या कार्रवाई की जाए। यदि कोई सदस्य दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ फटकार, चेतावनी, सदन से निलंबन या दुर्लभ मामलों में हिरासत जैसी कार्रवाई भी हो सकती है। फिलहाल लोकसभा में जारी गतिरोध और संभावित विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सदन में और तीखी बहस देखने को मिल सकती है।

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एयर नाऊ स्पेशल

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