रांची : झारखंड में राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा की हार के बाद महागठबंधन के भीतर सियासी तूफान खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेताओं ने हार के लिए सीधे तौर पर राजद और भाकपा माले को जिम्मेदार ठहरा दिया. हालांकि इन आरोपों को भाकपा माले ने एक सिरे से खारिज कर दिया। चुनाव परिणाम के बाद महागठबंधन में बयानबाजी तेज हो गई है और महागठबंधन की एकजुटता को लेकर भी चर्चा होने लगी है।
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प्रणव झा की हार पर कांग्रेस नेताओं के बयान
कांग्रेस विधायक सुरेश बैठा ने सबसे तीखा हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से राजद को मंत्रिमंडल और महागठबंधन से बाहर करने की मांग कर दी। उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव में राजद ने “गद्दारी” की है। ऐसे में उसे सरकार में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। सुरेश बैठा ने कहा कि कांग्रेस प्रत्याशी की हार सामान्य घटना नहीं है, बल्कि गठबंधन धर्म के उल्लंघन का परिणाम है।
उधर, राज्य के मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भी चुनाव परिणाम को गंभीर बताते हुए कहा कि माले और राजद ने गठबंधन के साथ धोखा किया है। उन्होंने कहा कि जो परिणाम सामने आया है, उसका राजनीतिक प्रभाव अवश्य पड़ेगा। आगे इसकी समीक्षा होगी और सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कुछ दलों के लिए महागठबंधन का मतलब भाजपा विरोध नहीं, बल्कि अपने राजनीतिक हित साधना रह गया है।
भाकपा माले ने आरोपों को किया ख़ारिज
हालांकि माले ने कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। सिंदरी विधायक चंद्रदेव महतो ने पलटवार करते हुए कहा कि माले ने कोई गद्दारी नहीं की है। कांग्रेस अपनी विफलता छिपाने और अपने लोगों को बचाने के लिए सहयोगी दलों पर आरोप लगा रही है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी ने तय रणनीति के अनुसार मतदान किया।
राजद नेताओं की प्रतिक्रिया
वहीं राजद भी लगातार अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब दे रहा है। राजद के मंत्री और विधायकों का कहना है कि उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा के पक्ष में ही मतदान किया था। पार्टी नेताओं का दावा है कि बिना किसी ठोस प्रमाण के राजद को निशाना बनाया जा रहा है।
राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी की हार के बाद अब महागठबंधन के भीतर अविश्वास की खाई गहरी होती दिखाई दे रही है। कौन साथ था और किसने आखिरी वक्त में राजनीतिक खेल कर दिया, यह सवाल अब झारखंड की सियासत में सबसे बड़ी बहस बन गया है।




