Monday, November 2, 2026

खरसावां के वीर शहीदों के वंशजों को सम्मानित करने हेतु विशेष आयोग का होगा गठन

रांची : “झारखंड की मिट्टी शहादत की गाथाओं से भरी है। जितना समृद्ध इतिहास हमारे राज्य का है, उतना किसी अन्य प्रदेश का नहीं।” अनगिनत लोगों ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा तथा आदिवासी अस्मिता के लिए अपनी जानें न्योछावर कीं। “हम लड़े हैं, तभी बचे हैं। हमारे वीर सपूतों ने कभी हार नहीं मानी।” उक्त बातें खरसावां गोलीकांड की 78वीं शहादत दिवस पर आज सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां स्थित शहीद पार्क में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहीं।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने शहीद स्मारक (शहीद बेदी) तथा वीर शहीद केरसे मुंडा चौक स्थित शहीद स्मृति-चिह्न पर श्रद्धांजलि अर्पित कर अमर वीर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। मंत्री दीपक बिरुवा, सांसद जोबा मांझी, विधायक दशरथ गगराई, विधायक सुखराम उरांव, विधायक सविता महतो, विधायक जगत मांझी तथा पूर्व विधायक लक्ष्मण टुडू सहित अनेक जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य व्यक्तियों ने भी शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित कर खरसावां के अमर वीरों के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की.

विशेष आयोग का होगा गठन

झारखंड की धरती शौर्य और बलिदान की प्रतीक रही है। इस मिट्टी की हर कण में आदिवासियों और मूलनिवासियों के संघर्ष की गाथा समाई हुई है। इसी गौरवशाली परंपरा को नमन करते हुए मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने खरसावां गोलीकांड की 78वीं शहादत दिवस पर राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई है कि खरसावां के वीर शहीदों के वंशजों की पहचान कर उन्हें सम्मानित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने इस दिशा में निर्णायक कदम की घोषणा करते हुए कहा कि एक विशेष आयोग का गठन किया जाएगा, जिसमें रिटायर्ड जज, स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं को शामिल किया जाएगा। यह आयोग सभी दस्तावेजों, ऐतिहासिक अभिलेखों और स्थानीय परंपराओं के आधार पर शहीद परिवारों की पहचान करेगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य उन परिवारों को उचित सम्मान, मान्यता और आर्थिक सहायता सुनिश्चित करना है, जिन्होंने जल, जंगल और जमीन की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर किए।

मुख्यमंत्री ने इसे राज्य सरकार की प्राथमिकता के रूप में रेखांकित करते हुए कहा, “हमारा यह नैतिक दायित्व है कि जिनकी कुर्बानी से झारखंड की अस्मिता और स्वतंत्र पहचान बची, उनके वंशजों को गर्व और सम्मान के साथ जीने का अवसर मिले।” उन्होंने कहा कि आगामी वर्ष तक सभी शहीद परिवारों की शिनाख्त कर समारोहपूर्वक सम्मानित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह पहल केवल श्रद्धांजलि मात्र नहीं, बल्कि एक इतिहास-संरक्षण अभियान है।

इस अभियान से युवा पीढ़ी को अपने पूर्वजों के संघर्ष और बलिदान की जानकारी मिलेगी तथा उनमें राज्य के प्रति आत्मसम्मान की भावना प्रबल होगी। राज्य सरकार ने पहले भी स्वतंत्रता सेनानियों, आंदोलनकारियों एवं शहीदों के परिजनों के कल्याण के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। अब खरसावां के वीरों के प्रति यह संवेदनशील कदम झारखंड की पहचान को और सशक्त करेगा। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि “हमारा संघर्ष जीवित रहेगा, जब तक हर शहीद के परिवार को उसका सम्मान नहीं मिल जाता। यही हमारे राज्य की असली दिशा और पहचान है।

आदिवासियों की अस्मिता के रक्षक

मुख्यमंत्री ने कहा — “आज हमारे बीच झारखंड आंदोलन के दिशा-निर्देशक, हमारे बाबा, हमारे पथप्रदर्शक गुरुजी शिबू सोरेन नहीं हैं। हमने एक ऐसा वृक्ष खो दिया जिसकी छांव में राज्य के आदिवासियों और मूलवासी समाज ने अपना मार्ग पाया। गुरुजी हमारे लिए सदैव प्रेरणास्त्रोत रहेंगे।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि झारखंड के हर आंदोलनकारी, हर आदिवासी, हर ग्रामीण के दिल में गुरुजी का स्थान अमिट है। उन्होंने झारखंड की राजनीति में मानवीयता, सरलता और संघर्षशीलता की मिसाल कायम की। “गुरुजी केवल एक व्यक्ति नहीं, एक विचारधारा हैं — जो न्याय, समानता और आत्मसम्मान की राह दिखाती है।”

उन्होंने आगे कहा कि गुरुजी के सान्निध्य में झारखंड के आदिवासी समाज ने अपनी पहचान को पहचाना और उसे संविधान के दायरे में दर्ज कराया। हमने उनका मार्गदर्शन हमेशा अपने लिए ऊर्जा की तरह महसूस किया। उनका संघर्ष ही हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। गुरुजी अब हमारे बीच भले नहीं हैं, लेकिन उनकी छांव, उनका आशीर्वाद और उनका मार्गदर्शन हमेशा रहेगा

पेसा कानून से सशक्त होगा ग्राम स्वराज

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार ने झारखंड में पेसा कानून को लागू कर दिया है, जिससे अब ग्रामसभा और ग्राम पंचायतों के माध्यम से ग्रामीणों को उनके अधिकार प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि “यह कानून हमारे जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा का आधार है। इसके माध्यम से ग्रामीण अपने संसाधनों पर स्वयं निर्णय ले सकेंगे और स्वशासन की भावना सशक्त होगी।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब सरकार का प्रयास रहेगा कि पेसा अधिनियम से संबंधित जानकारी प्रत्येक गांव तक पहुंचे। इसके लिए राज्यभर में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा ताकि हर ग्रामीण अपने अधिकारों को जान सके और उनका उपयोग कर सके। उन्होंने कहा कि पेसा कानून हमारे पूर्वजों के संघर्ष और अधिकार भावना का प्रतीक है, जो ग्राम स्वराज के वास्तविक स्वरूप को साकार करेगा.

नए विकास और सशक्तिकरण का प्रतीक

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि झारखंड राज्य को बने 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं और अब यह युवा झारखंड विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “हमारा संकल्प है कि आने वाले वर्षों में झारखंड को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल किया जाए। ”मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है, क्योंकि “एक शिक्षित पीढ़ी ही मजबूत राज्य की नींव होती है।”

उन्होंने बताया कि गुरुजी क्रेडिट कार्ड योजना के तहत छात्र 15 लाख रुपये तक का ऋण 4% ब्याज दर पर लेकर पढ़ाई कर सकते हैं, जिसकी वापसी नौकरी लगने के बाद ही करनी होगी। उन्होंने मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना को महिला सशक्तिकरण की मिसाल बताते हुए कहा कि इससे राज्य की बेटियां शिक्षित, आत्मनिर्भर और समाज में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। मुख्यमंत्री ने युवाओं से शहीदों के आदर्शों पर चलकर झारखंड के विकास में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

इस अवसर पर मंत्री दीपक बिरुवा, सांसद जोबा मांझी, विधायक दशरथ गगराई, विधायक सुखराम उरांव, विधायक समीर मोहंती, विधायक सविता महतो, विधायक जगत मांझी एवं पूर्व विधायक लक्ष्मण टुडू सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में जिला के उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, सभी विभागों के पदाधिकारी तथा हजारों की संख्या में स्थानीय लोगों ने उपस्थित होकर शहीदों को नमन किया।

एयर नाऊ स्पेशल

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