Tuesday, November 3, 2026

PLFI सुप्रीमो को सरेंडर के नाम पर 48 लाख की ठगी का पर्दाफाश, NTRO के फर्जी कर्मचारी की साजिश बेनकाब

रांची : रांची की जांच एजेंसियों ने एक बड़ी ठगी की साजिश का पर्दाफाश किया है, जिसमें PLFI के सुप्रीमो दिनेश गोप को सरेंडर कराने के नाम पर 48 लाख रुपये की ठगी की गई थी। ठगी के आरोप में गुजरात के निवासी नंदलाल स्वर्णकार मुख्य आरोपी हैं, जिन्होंने स्वयं को National Technical Research Organisation (NTRO) का निलंबित कर्मचारी बताया था।

धोखाधड़ी की पृष्ठभूमि

मिली जानकारी के अनुसार, PLFI के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों का दबाव बढ़ने पर संगठन ने दिनेश गोप को सरेंडर कराए जाने की योजना बनाई थी। इस क्रम में रांची जिले के बेड़ो निवासी चंद्रशेखर से पूछताछ के दौरान पता चला कि उन्होंने इस योजना में शामिल लोगों के संपर्क और पैसे ट्रांसफर की जानकारी दी। चंद्रशेखर, जो PLFI के सदस्य रहे हैं, ने बताया कि नवनीन भाई जयंती भाई पटेल ने दिल्ली निवासी नंदलाल स्वर्णकार से मिलवाया।

पैसे का अवैध लेन-दे और हवाला नेटवर्क

नंदलाल ने व्रतियों को यह आश्वासन दिया कि दिनेश गोप को सरेंडर कराया जायेगा, इसके बदले में उन्हें पैसे देने होंगे। इसके पश्चात हवाला नेटवर्क के माध्यम से पानीपत (हरियाणा) से लगभग 48 लाख रुपये भेजे गए। इस राशि में से 3 लाख रुपये कमीशन में काट लिए गए थे। नंदलाल ने इस राशि में से 17 लाख रुपये लेकर डेयरी का व्यापार शुरू कर दिया।

जांच एजेंसियों की भूमिका

Enforcement Directorate (ED) और National Investigation Agency (NIA) द्वारा इस मामले की जांच चल रही है। पहले चंद्रशेखर से पूछताछ के दौरान यह साजिश उजागर हुई, उसके बाद सुमंत कुमार और जितेंद्र कुमार नामक अन्य आरोपियों से भी पूछताछ की गई। इन दोनों ने स्वीकार किया कि उन्होंने नवनीन भाई जयंती भाई पटेल के माध्यम से नंदलाल व नवीन भाई को पैसे दिए थे।

PLFI प्रमुख तथा संगठन की जानकारी

दिनेश गोप, झारखंड में सक्रिय प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन PLFI के प्रमुख माने जाते हैं। उनके खिलाफ चार दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या, उग्रवाद, विस्फोटक एवं आतंकवादी गतिविधियाँ शामिल हैं। वे नेपाल से गिरफ्तार किए गए और वर्तमान में जेल में बंद हैं।

घटना के निहितार्थ

इस प्रकरण से स्पष्ट होता है कि उग्रवादी संगठनों के वित्तीय तथा लॉजिस्टिक नेटवर्क को ठगी, हवाला और फर्जी दावों के ज़रिए संचालित किया जा सकता है। नंदलाल द्वारा NTRO का निलंबित कर्मचारी होने का दावा करके इस तरह की साजिश रची गयी, जिससे कानून-व्यवस्था की चुनौतियां और बढ़ गयी हैं।

सरेंडर कराने के नाम पर 48 लाख रुपये की ठगी और उसमें से बड़ी राशि का अवैध व्यवसाय में निवेश सरासर अपराध है। जांच एजेंसियों को इस तरह के वित्‌तीय अपराधों पर विशेष ध्यान देना होगा ताकि उग्रवादी संगठनों को आर्थिक रूप से प्रोत्साहन न मिल सके। इस प्रकरण ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि आतंकवाद एवं उग्रवाद-वित्त पोषण को सिर्फ हथियारों से नहीं बल्कि आर्थिक तरीकों से भी संचालित किया जाता है।

 

 

 

एयर नाऊ स्पेशल

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