देश : कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के करोड़ों पॉलिसीधारकों की कमाई को अडानी समूह की कंपनियों में लगाया गया। पार्टी का कहना है कि यह निवेश ऐसे समय किया गया, जब अडानी समूह पर अमेरिका में घूसखोरी के मामले दर्ज हुए थे और उसकी साख पर सवाल उठ गए थे।
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दुनियाभर के बैंकों ने दिया कर्ज से मना, सरकार ने बढ़ाया LIC पर दबाव
कांग्रेस का आरोप है कि जब विदेशी बैंकों ने अडानी समूह को कर्ज देने से इनकार कर दिया, तब केंद्र सरकार ने LIC को मजबूर किया कि वह लगभग 3.9 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹33,000 करोड़ का निवेश अडानी की कंपनियों में करे। कांग्रेस का कहना है कि यह कदम एक व्यापारी को बचाने और निजी हित साधने के लिए उठाया गया।
निवेश प्रस्ताव की तैयारी और सरकारी हस्तक्षेप का आरोप
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मई 2025 में LIC के आंतरिक दस्तावेजों में अडानी समूह में भारी निवेश का प्रस्ताव तैयार किया गया और उसे मंजूरी दिलाई गई। उनका कहना है कि निवेश का लक्ष्य अडानी समूह पर बाजार का भरोसा कायम रखना बताया गया, लेकिन असल में इसका लाभ केवल समूह को हुआ।
LIC ने आरोपों को किया खारिज, कहा- दबाव नहीं था
विवाद के बीच LIC ने सफाई दी है कि उसके सभी निवेश फैसले अपनी नीतियों और आंतरिक प्रक्रिया के तहत किए जाते हैं और सरकार की ओर से कोई दबाव नहीं बनाया गया। LIC ने कहा कि वह पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ निवेश करती है।
कांग्रेस बोली – आम जनता की कमाई जोखिम में
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि LIC की 30 करोड़ से ज्यादा पॉलिसी धारक जनता के भरोसे पर अपनी खून-पसीने की कमाई जमा करते हैं। ऐसे में इस रकम को अडानी समूह को अर्थिक संकट से बचाने के लिए इस्तेमाल करना जनता के भरोसे से खिलवाड़ है। पार्टी ने इसे “ब्रीच ऑफ ट्रस्ट” और “जनता के पैसे की लूट” बताया है।
बाजार में गिरावट के बावजूद निवेश पर सवाल
कांग्रेस का कहना है कि जब 2023 में अडानी के शेयरों में 32% से ज्यादा गिरावट आई थी, तब भी LIC और SBI ने अडानी के FPO (Follow-on Public Offer) में पैसे लगाए। इससे सरकार की मंशा पर सवाल और गहरे हो जाते हैं कि आखिर जनता के पैसे को इतना बड़ा जोखिम क्यों दिया गया?
जांच की मांग तेज – PAC या JPC की जांच हो
कांग्रेस ने कहा है कि यह मामला सिर्फ निवेश नहीं बल्कि शासन व्यवस्था और लोकतंत्र में पारदर्शिता का मुद्दा है। उन्होंने संसद की लोक लेखा समिति (PAC) या संयुक्त संसदीय समिति (JPC) से इस पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि बिना व्यापक जांच के सच सामने नहीं आएगा।
सरकार की चुप्पी पर भी सवाल
कांग्रेस ने पूछा है कि –
- क्या पॉलिसीधारकों को जोखिम की जानकारी दी गई?
- अडानी के खिलाफ जांच के बीच यह निवेश क्यों करवाया गया?
- क्या LIC की निवेश नीति में बदलाव किया गया?
पार्टी का कहना है कि जब सवाल जनता की कमाई का हो, सरकार की जवाबदेही तय होना जरूरी है।


