विदेश : जापान की राजनीति में मंगलवार को एक नया इतिहास रच गया। देश को पहली बार एक महिला प्रधानमंत्री मिली है। साने ताकाइची ने संसद के निचले सदन में हुए चुनाव में 237 वोट हासिल कर प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।
उनके प्रतिद्वंदी को 149 वोट मिले। इसके बाद ऊपरी सदन में भी उन्होंने जीत दर्ज की, जहां पहले दौर में बहुमत से एक वोट कम रहने के बाद दूसरे दौर में 125-46 वोटों से बढ़त बनाई।
Highlights:
कमजोर गठबंधन के साथ मिली जिम्मेदारी
साने ताकाइची को सत्ता ऐसे समय में मिली है जब उनकी पार्टी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) कमजोर स्थिति में है।
जुलाई में हुए ऊपरी सदन के चुनाव में पार्टी को करारी हार झेलनी पड़ी थी। इसके बाद पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ा और तत्कालीन प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा को पद छोड़ना पड़ा। ऐसे माहौल में ताकाइची को प्रधानमंत्री बनाया गया।
कई बार की कोशिश के बाद मिली सफलता
इस महीने की शुरुआत में ताकाइची को LDP का नेता चुना गया था। यह उनका तीसरा प्रयास था प्रधानमंत्री बनने का।
उन्होंने 2021 और 2024 में भी प्रधानमंत्री पद के लिए दावा पेश किया था, लेकिन तब उन्हें पार्टी के सांसदों का पर्याप्त समर्थन नहीं मिला था। इस बार हालात बदले और उन्होंने इतिहास रच दिया।
शिंजो आबे की करीबी और विचारधारा की समर्थक
साने ताकाइची को जापान के दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की करीबी माना जाता है। वे आबे की तरह ही मजबूत सेना, सख्त आव्रजन नीति और शांतिवादी संविधान में संशोधन की पक्षधर हैं।
ताकाइची ने संसद में कहा,”जापान को अपनी रक्षा नीति मजबूत करनी होगी। आज का समय निर्णायक है।”
विश्व नेताओं ने दी बधाई
प्रधानमंत्री बनने के बाद ताकाइची को दुनिया भर से बधाइयाँ मिलीं।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा,”भारत-जापान के संबंध नई ऊंचाइयों पर पहुंचेंगे। साने ताकाइची को हार्दिक बधाई।” अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी शुभकामना देते हुए कहा, “ताकाइची एक मजबूत नेता हैं, जो जापान को विश्व मंच पर नई पहचान दिलाएंगी।”
नीतियों पर सख्त और रूढ़िवादी रुख
साने ताकाइची अपनी रूढ़िवादी सोच और सख्त नीतियों के लिए जानी जाती हैं।
उनके प्रमुख विचार इस प्रकार हैं:
- समलैंगिक विवाह का विरोध : उनका मानना है कि इससे पारिवारिक मूल्य कमजोर होते हैं।
- महिला सम्राट का विरोध : वे देश में केवल पुरुष राजा के शासन की समर्थक हैं।
- आव्रजन पर सख्ती : ताकाइची का कहना है कि जापान में अवैध रूप से आने वालों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
- ट्रेड डील पर पुनर्विचार : उन्होंने अमेरिका के साथ हाल की 550 अरब डॉलर की डील को फिर से बातचीत के लिए कहा है।
- वैवाहिक नाम बदलने के खिलाफ : वे दंपतियों के अलग-अलग सरनेम रखने की नीति का विरोध करती हैं।
अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर असहमति
अगस्त में जापान और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील के तहत जापान ने अमेरिका में 550 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया था। लेकिन ताकाइची ने इस डील को जापान के हितों के खिलाफ बताया। उनका कहना है कि, “यह समझौता असंतुलित है, इसे फिर से तय किया जाना चाहिए।”
निजी जीवन भी रहा सुर्खियों में
साने ताकाइची का निजी जीवन भी कई बार चर्चा में रहा है। उन्होंने 2004 में अपनी पार्टी के सांसद ताकू यामामोटो से शादी की थी। 2017 में दोनों के बीच राजनीतिक मतभेदों के चलते तलाक हो गया, लेकिन 2021 में दोनों ने दोबारा शादी कर ली। इसके बाद यामामोटो ने अपना सरनेम बदलकर ताकाइची रख लिया। मीडिया में जब यह खबर आई तो ताकाइची ने कहा था, “राजनीति और निजी जीवन को हमेशा अलग रखना चाहिए।”
महंगाई और जनता की नाराजगी बनी चुनौती
ताकाइची ऐसे समय में सत्ता में आई हैं जब जापान में महंगाई बढ़ रही है और जनता में सरकार को लेकर असंतोष है।
लोग आर्थिक सुधारों की उम्मीद कर रहे हैं। ऐसे में ताकाइची के सामने देश की आर्थिक स्थिरता बनाए रखना, रोजगार सृजन और जनता का भरोसा जीतना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
महिला नेतृत्व का नया अध्याय
साने ताकाइची का प्रधानमंत्री बनना जापान के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। वे न केवल पहली महिला प्रधानमंत्री हैं, बल्कि जापान की उस नई पीढ़ी की प्रतीक भी हैं जो बदलाव चाहती है लेकिन परंपराओं को भी महत्व देती है। उन्होंने पद ग्रहण के बाद कहा, “मैं जापान की जनता की सेवा के लिए काम करूंगी। यह जिम्मेदारी मेरे लिए सम्मान है।” जापान की नई प्रधानमंत्री साने ताकाइची अब उस मोड़ पर हैं। जहां उन्हें देश के राजनीतिक और आर्थिक दोनों मोर्चों पर खुद को साबित करना होगा। उनकी नीतियाँ कठोर हैं, लेकिन उनके नेतृत्व में जापान किस दिशा में आगे बढ़ेगा, यह आने वाले महीनों में तय होगा।


