देश : आज धनतेरस है, आप सभी दर्शकों और तमाम देशवासियों को हमारी air now team की ओर से धनतेरस की ढ़ेर सारी शुभकामनाएं। आप सभी लोगों को पता है कि धनतेरस दिवाली के ठीक पहले मनाई जाती है और इस दिन हम क्या करते हैं, हमारे घरों में क्या होता है। लेकिन शायद हमारे कुछ दर्शकों को यह नहीं भी पता होगा कि धनतेरस क्या होता है, और लोग इसे क्यों मनाते हैं, इस दिन क्या करते हैं ?
धनतेरस क्या होता है ?
आज मैं आपको धनतेरस के बारे में विस्तार से बताती हूं। हर साल की तरह इस साल भी आज धनतेरस के मौके पर आपका जीवन खुशियों, खरीदारी और रौनक से भरा रहेगा। धनतेरस के दिन लोग नए-नए सामान खरीदते हैं — कोई बर्तन लेता है, कोई गाड़ी, तो कोई सोना-चांदी। माना जाता है कि धनतेरस के दिन अगर आप कोई धातु जैसे सोना, चांदी या तांबा खरीदते हैं, तो घर में माँ लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और धन-संपत्ति बढ़ती है।
झाड़ू खरीदने का चलन
लोगों में आज के दिन झाड़ू खरीदने का भी चलन है, यह सोचकर कि इससे माँ लक्ष्मी खुश होती हैं और घर से दरिद्रता दूर होती है। कहा भी जाता है कि जो लोग धनतेरस के दिन कुछ नया सामान खरीदते हैं, तो इससे उनकी तरक्की होती है। खैर, यह सब तो हर साल होता है, लेकिन इस बार की बात कुछ अलग है। क्यों अलग है, क्योंकि इस साल सोने और चांदी के दाम आसमान छू रहे हैं।
सोना हुआ महंगा
जहाँ पहले लोग आराम से 10 ग्राम सोना हजारों में खरीद लेते थे, वहीं अब 10 ग्राम सोने की कीमत रिकॉर्ड सवा लाख रुपये के ऊपर पहुँच चुकी है। इसी तरह चांदी की कीमत भी लगभग दो लाख रूपये प्रति किलो हो गई है. ऐसे में कई लोग तो सोच में हैं कि अब क्या खरीदा जाए? लोगों का मानना है कि इस दिन झाड़ू या चांदी का सिक्का ही ठीक रहेगा, क्योंकि सोने की कीमत देखकर तो जेब खाली होने लगती है। लेकिन फिर भी, परंपरा तो परंपरा है — लोग कुछ न कुछ अपने बजट के अनुसार जरूर खरीदते हैं, चाहे छोटा सिक्का ही क्यों न हो।
धनतेरस का महत्व
धनतेरस के दिन लोग न सिर्फ खरीदारी करते हैं, बल्कि अपने घर की साफ-सफाई और सजावट भी करते हैं। माना जाता है कि माँ लक्ष्मी साफ-सुथरे और सजे हुए घरों में प्रवेश करती हैं। लोग घर के दरवाजे पर रंगोली बनाते हैं, दीप जलाते हैं और शाम को माँ लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करते हैं। कुछ लोग अपने व्यापार या दुकान की शुरुआत भी इसी दिन करते हैं, ताकि पूरे साल व्यापार में बरकत बनी रहे।
ऑनलाइन शॉपिंग का चलन
अगर बात करें इस साल की तो अब बाजारों में पहले जैसी भीड़ तो नहीं है, लेकिन लोगों का उत्साह वैसा ही है। भले ही सोना महंगा हो गया हो, लेकिन लोग अपनी परंपरा नहीं छोड़ते। बहुत से लोग आज ऑनलाइन शॉपिंग भी करते हैं — कोई मोबाइल लेता है, कोई गहना, तो कोई रसोई का नया बर्तन। दरअसल, लोगों का मानना है कि इस दिन कुछ भी नया लेना शुभ होता है, चाहे वो छोटा हो या बड़ा।
क्यों मनाते हैं धनतेरस ?
धनतेरस दिवाली से एक दिन पहले मनाई जाती ये सबको पता है। अब बात करते हैं कि आखिर धनतेरस मनाई क्यों जाती है। वो इसलिए क्योंकि यह दिन एक धार्मिक और पौराणिक दोनों की महत्व है। मान्यता है कि इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान भगवान धनवंतरि प्रकट हुए थे, जो आयुर्वेद और स्वास्थ्य के देवता माने जाते हैं। उन्होंने अमृत कलश लेकर सभी देवताओं को अमर रहने का वरदान दिया था। इसलिए इस दिन को धनतेरश कहते हैं। यानी धन का मतलब धनवंतरि और तेरस यानी त्रयोदशी तिथि।
धनतेरस की कहानी
एक कहानी भी प्रचलित है। कहानी कुछ इस प्रकार है, एक समय में एक राजा के बेटे की शादी के चार दिन बाद उसकी मृत्यु हो जानी थी, ऐसा उसकी कुंडली में लिखा था। जब तेरहवें दिन यमराज उसे लेने आए, तो उसकी पत्नी ने दरवाजे पर ढेर सारे दीपक जला दिए और बहुत सारे सोने-चांदी के गहने सजा दिए। जब यमराज आए, तो उनकी आँखों में इतना तेज़ प्रकाश पड़ा कि वो अंदर जा ही नहीं पाए। तब उन्होंने कहा कि जो कोई भी इस दिन दीप जलाएगा, उसके घर में अकाल मृत्यु नहीं होगी। तभी से इस दिन यानी धनतेरश के दिन दीपदान और खरीदारी की परंपरा शुरू हुई।
भगवान धनवंतरि की पूजा
धनतेरस केवल खरीदारी का दिन नहीं है, बल्कि यह एक सकारात्मक सोच का दिन है — एक ऐसा दिन जो हमें याद दिलाता है कि जीवन में धन, सेहत और खुशियाँ सब ज़रूरी हैं। इस दिन भगवान धनवंतरि की पूजा इसलिए की जाती है ताकि हमें अच्छी सेहत मिले, और माँ लक्ष्मी की आराधना इसलिए की जाती है ताकि हमारे घर में कभी किसी चीज़ की कमी न हो। यह दिन हमें यह भी सिखाता है कि धन केवल सोने-चांदी तक सीमित नहीं है, बल्कि सच्चा धन हमारे परिवार की खुशियाँ, प्रेम और स्वास्थ्य है।
धनतेरस सिर्फ खरीदारी का त्योहार नहीं
तो चाहे आप इस साल सोना खरीदें, झाड़ू लें, या बस एक दिया जलाएँ ,सबसे जरूरी है कि आप इस दिन अपने घर और आसपास में खुशियां फैलाएँ। क्योंकि असली धनतेरस वही है, जहाँ मन में सच्ची खुशी और घर में अपनापन हो।
कुल मिलाकर, धनतेरस सिर्फ खरीदारी का त्योहार नहीं, बल्कि उम्मीदों और शुभ शुरुआतों का दिन है। ये दिन हमें याद दिलाता है कि चाहे हालात कैसे भी हों , महंगाई बढ़े या हालात बदलें , खुशियाँ और श्रद्धा अगर दिल में है, तो हर दिन त्योहार बन सकता है।


