बिहार : बिहार की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि चुनाव आयोग आखिर कब चुनाव की तारीखों का ऐलान करेगा। हर गली-मोहल्ले से लेकर पटना के पॉलिटिकल गलियारों तक यही चर्चा है। और अब ये इंतजार ज्यादा लंबा नहीं है। सूत्र बताते हैं कि चुनाव आयोग अगले हफ्ते प्रेस कॉन्फ्रेंस करके तारीखों का ऐलान कर देगा। क्यों? इसका सीधा जवाब है कि 22 नवंबर 2025 को मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल खत्म हो रहा है।
उससे पहले नई विधानसभा और नई सरकार बन जानी चाहिए। आज की तारीख से देखें तो सिर्फ 52 दिन बाकी हैं। यानी चुनाव आयोग के पास ज्यादा वक्त नहीं है। पिछले चुनावों का पैटर्न उठाकर देखें तो सितंबर के आखिरी हफ्ते तक बिहार चुनाव की घोषणा हो जानी चाहिए थी। लेकिन इस बार अक्टूबर का पहला हफ्ता आ चुका है और अभी तक डेट सामने नहीं आई है। अब सवाल ये है कि आखिर आयोग कब प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगा। खबर है कि 4 और 5 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, एसएस संधू और विनीत जोशी बिहार का दौरा करेंगे। दो दिन तक तैयारी का जायजा लेंगे। 5 अक्टूबर की शाम दिल्ली लौटेंगे और फिर 6 या 7 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके चुनाव की तारीखों का ऐलान हो सकता है।
चुनाव कितने फेज में होंगे
अब बात आती है कि चुनाव कितने फेज में होगा। जानकार मान रहे हैं कि इस बार दो फेज में चुनाव हो सकता है। क्यों? दो वजह हैं। पहली वजह ये कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया 30 सितंबर तक खिंच गई। जब तक फाइनल लिस्ट जारी नहीं होती, तब तक चुनाव की घोषणा नहीं हो सकती थी। दूसरी वजह है बिहार की सिक्योरिटी सिचुएशन। 2010 और 2015 में पांच-छह चरणों में वोटिंग हुई थी, क्योंकि नक्सल प्रभावित जिले ज्यादा थे। लेकिन अब हालात काफी हद तक सुधर चुके हैं। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट कहती है कि अब सिर्फ 8 जिले आंशिक तौर पर नक्सल प्रभावित हैं। यही वजह है कि 2020 में चुनाव तीन चरणों में हुआ और इस बार दो चरणों की संभावना जताई जा रही है।
वोटिंग की संभावित तारीखें
छठ पर्व बिहार की सबसे बड़ी धार्मिक-सामाजिक घटना है। लाखों बिहारी बाहर से घर लौटते हैं। आयोग चाहता है कि ये लोग भी वोट डालें। इसलिए संभावना है कि छठ के 3-4 दिन बाद पहला फेज रखा जाए। छठ 28 अक्टूबर को खत्म हो रहा है। ऐसे में 31 अक्टूबर से 2 नवंबर के बीच पहला चरण हो सकता है और दूसरा चरण 5 से 7 नवंबर के बीच।
इसको समझने के लिए पिछले चुनावों का डेटा देख लीजिए। 2020 में नोटिफिकेशन 1 अक्टूबर को आया और 28 अक्टूबर को पहला चरण हुआ। 2015 में 16 सितंबर को नोटिफिकेशन आया और 12 अक्टूबर को वोटिंग हुई। 2010 में 27 सितंबर को नोटिफिकेशन आया और 21 अक्टूबर को वोटिंग। औसतन 24 से 28 दिन के अंदर पहले फेज की वोटिंग होती है। हाल के दिल्ली, झारखंड और महाराष्ट्र चुनाव भी यही पैटर्न दिखाते हैं। तो अगर 7 अक्टूबर को चुनाव की घोषणा होगी तो नोटिफिकेशन 10 अक्टूबर तक जारी हो जाएगा और उसके 25वें दिन यानी 3 से 5 नवंबर के बीच पहला फेज होना लगभग तय है।
पिछले चुनावों का पैटर्न
चुनाव आयोग का पैटर्न रहा है कि आखिरी चरण के तीन दिन बाद मतगणना होती है। अगर आखिरी चरण 5 नवंबर को होगा तो 8 नवंबर को नतीजे आ जाएंगे। अगर 7 नवंबर को लास्ट फेज होगा तो 10 नवंबर को रिजल्ट। 2020 में भी यही हुआ था, जब 7 नवंबर को वोटिंग और 10 नवंबर को नतीजे आए। इसके बाद सरकार गठन की बारी। संविधान के अनुच्छेद 172 में साफ लिखा है कि विधानसभा का कार्यकाल पांच साल से ज्यादा नहीं हो सकता। बिहार की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर तक है। यानी उससे पहले नई सरकार का शपथ ग्रहण हो जाना चाहिए।
NDA और महागठबंधन की सीटों की खींचतान
NDA और महागठबंधन पर दोनों खेमों में सीटों के बंटवारे पर खींचतान जारी है। NDA की बात करें तो चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा जीतने वाली सीटें मांग रहे हैं। लेकिन ज्यादातर सीटें भाजपा और JDU की पारंपरिक हैं, जिन्हें छोड़ने का सवाल ही नहीं उठता। LJP(R) 45 सीट मांग रही है, RLM 15 और हम 20-25 सीटें। लेकिन भाजपा कह रही है LJP(R) को 20, हम को 15 और RLM को 8 सीटें। भाजपा अपनी 84 सीटें और JDU अपनी 60 सीटें छोड़ना नहीं चाहते। यही पेच है। महागठबंधन की बात करें तो कांग्रेस और RJD के बीच खींचतान सबसे ज्यादा है। कांग्रेस पिछले चुनाव में 70 सीटों पर लड़ी थी और सिर्फ 19 जीत पाई थी। इस बार कांग्रेस कह रही है कि कमजोर सीटें नहीं चाहिए। पार्टी 76 सीटों की मांग कर रही है। VIP 60 सीटें चाहती है और माले 40। लेकिन RJD का रुख टाइट है।
8 अक्टूबर को NDA की दिल्ली में बड़ी बैठक है। वहां सीट शेयरिंग पर आखिरी फैसला हो सकता है। महागठबंधन भी 10 अक्टूबर तक फॉर्मूला सामने ला सकता है। तो कुल मिलाकर कहानी ये है कि अगले हफ्ते चुनाव की तारीखें सामने आ जाएंगी। नवंबर के पहले हफ्ते में वोटिंग होगी, 8 से 10 नवंबर के बीच नतीजे आएंगे और 22 नवंबर से पहले बिहार की 18वीं विधानसभा का गठन हो जाएगा। अभी देखना ये है कि NDA और महागठबंधन सीटों की किस तरह से एडजस्टमेंट करते हैं और जनता किसे चुनती है।


