नई दिल्ली : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सोमवार को मौद्रिक नीति (Monetary Policy) की समीक्षा बैठक के बाद रेपो रेट को 5.5% पर स्थिर रखने का फैसला किया। यानी अब बैंक लोन की ब्याज दरों और ग्राहकों की EMI में कोई बदलाव नहीं होगा। इससे पहले अगस्त 2025 की बैठक में भी RBI ने दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया था।
GDP ग्रोथ अनुमान बढ़ाया गया
RBI ने देश की GDP ग्रोथ का अनुमान 6.5% से बढ़ाकर 6.8% कर दिया है। यह फैसला 29 सितंबर से 1 अक्टूबर तक चली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक में लिया गया। जानकारी देते हुए RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि कमेटी के सभी 6 सदस्यों ने एकमत होकर ब्याज दरें स्थिर रखने का समर्थन किया।
महंगाई नियंत्रण पर असर
गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि हाल ही में GST कटौती के बाद महंगाई में कमी आई है। इस वजह से ब्याज दरों को फिलहाल जस का तस रखने का निर्णय लिया गया। उनका कहना था कि आर्थिक स्थिरता बनाए रखना और महंगाई को नियंत्रित करना इस समय प्राथमिकता है।
रेपो रेट क्या है?
रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। रेपो रेट बढ़ने पर बैंकों के लिए कर्ज महंगा हो जाता है, जिससे ग्राहकों के लिए लोन और EMI बढ़ जाते हैं। रेपो रेट घटने पर बैंकों को सस्ता कर्ज मिलता है और ग्राहकों के लिए भी लोन की दरें घटती हैं।
इस साल तीन बार घट चुका है रेपो रेट
- फरवरी 2025: 6.5% से घटाकर 6.25%
- अप्रैल 2025: 0.25% की कटौती
- जून 2025: 0.50% की कटौती
- कुल मिलाकर इस साल रेपो रेट में 1% की कमी की गई। यह कटौती करीब 5 साल बाद देखने को मिली।
एक्सपर्ट्स की राय
अल्फा कॉर्प डेवलपमेंट लिमिटेड के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर और सीएफओ संतोष अग्रवाल ने कहा –
“RBI का रेपो रेट 5.5% पर स्थिर रखने का निर्णय आर्थिक स्थिरता और महंगाई नियंत्रण के लिए संतुलित कदम है। रियल एस्टेट सेक्टर में इससे डेवलपर्स को फाइनेंसिंग कॉस्ट में अचानक बदलाव का जोखिम नहीं होगा और होमबायर्स को EMI स्थिर रहने का भरोसा मिलेगा। बड़े प्रोजेक्ट्स की मांग बनी रहेगी।”
MPC की बैठक का शेड्यूल
RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) में कुल 6 सदस्य होते हैं, जिनमें 3 RBI से और 3 केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। यह बैठक हर दो महीने में होती है। चालू वित्त वर्ष (2025-26) में कुल 6 बैठकें निर्धारित हैं। पहली बैठक 7-9 अप्रैल को हुई थी।


