धनबाद : धनबाद के बारामुड़ी खटाल को हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ अब राजनीतिक विरोध तेज हो गया है। इसी कड़ी में पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव बुधवार को धनबाद पहुंचे। यादव महासभा और संयुक्त मोर्चा की ओर से उनके समर्थन में रैली निकाली गई, जिसमें सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया।
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इसके बाद आयोजित सभा को संबोधित करते हुए पप्पू यादव ने जिला प्रशासन और अधिकारियों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बारामुड़ी खटाल के परिवारों के हक और अधिकार की लड़ाई अब केवल धनबाद तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे सड़क से संसद तक पहुंचाया जाएगा।
पप्पू यादव ने ऐलान किया कि संसद के आगामी सत्र में बारामुड़ी खटाल का मुद्दा उठाया जाएगा। सत्र शुरू होते ही वह सदन में गरीब परिवारों के विस्थापन और उनके अधिकारों से जुड़े सवाल उठाएंगे, ताकि इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में लाया जा सके।
उन्होंने धनबाद के अंचल अधिकारी (सीओ) की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए। पप्पू यादव ने सीओ की संपत्ति की जांच की मांग को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को पत्र लिखने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले में कई अधिकारी भाजपा के इशारे पर काम कर रहे हैं और गरीब परिवारों के साथ अन्याय किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक पदों पर बैठे अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। सरकारी कार्रवाई के नाम पर गरीब परिवारों को परेशान करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पप्पू यादव ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन किसी सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि कथित भ्रष्ट अधिकारियों और व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े शब्दों में चेतावनी दी। कहा कि प्रभावित परिवारों के साथ अन्याय जारी रहा तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर वह खुद बारामुड़ी खटाल पहुंचकर धरने पर बैठेंगे।
उन्होंने कहा कि गरीबों के घर और परिवार का भविष्य दांव पर लगाकर कोई भी प्रशासनिक कार्रवाई उचित नहीं है। बारामुड़ी खटाल के लोगों को उनके अधिकारों से वंचित करने की कोशिश हुई तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। इस लड़ाई में प्रभावित परिवारों को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा और उनके हक के लिए हर स्तर पर आवाज उठाई जाएगी।
पप्पू यादव के इस ऐलान के बाद बारामुड़ी खटाल का मामला एक बार फिर धनबाद की राजनीति के केंद्र में आ गया है। अब सबकी नजरें प्रशासन के अगले कदम और इस मुद्दे पर होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हैं।

