News Desk: Sharad Purnima हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है. आश्विन मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व देश के कई हिस्सों में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है. इस दिन रात के समय चंद्रमा की पूजा करने और खीर बनाकर चांदनी में रखने की परंपरा काफी पुरानी है. Sharad Purnima Kheer की यह परंपरा खास तौर पर उत्तर भारत के कई राज्यों में देखने को मिलती है.
Highlights:
बिहार के बक्सर सहित कई जगहों पर लोग इस रात घर में दूध, चावल और मेवों से खीर तैयार करते हैं और उसे खुले आसमान के नीचे रखते हैं. मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की रोशनी विशेष मानी जाती है और इस रोशनी में रखी खीर को सुबह प्रसाद के रूप में खाया जाता है.
Sharad Purnima Kheer को लेकर धार्मिक विश्वास
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा 16 कलाओं से पूर्ण होता है. लोगों का विश्वास है कि इस दिन चंद्रमा की किरणों में विशेष दिव्यता होती है. इसी वजह से Sharad Purnima Kheer को चांदनी में रखने की परंपरा शुरू हुई. कई परिवारों में माना जाता है कि रातभर चांदनी में रखी खीर में सकारात्मक ऊर्जा आती है. सुबह पूजा करने के बाद परिवार के सभी लोग इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं.
हालांकि, यह विश्वास धार्मिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है और इसका वैज्ञानिक प्रमाण अभी उपलब्ध नहीं है. शरद पूर्णिमा का यह पर्व केवल पूजा और परंपरा तक सीमित नहीं है. यह परिवार के लोगों को एक साथ बैठने, समय बिताने और त्योहार की खुशियां साझा करने का अवसर भी देता है.
Sharad Purnima Kheer बनाने की परंपरा और खासियत
शरद पूर्णिमा की खीर सामान्य दिनों में बनाई जाने वाली खीर जैसी ही होती है. इसे बनाने के लिए दूध, चावल, चीनी, इलायची और सूखे मेवों का इस्तेमाल किया जाता है. कई घरों में लोग अपनी पसंद के अनुसार इसमें बादाम, काजू और किशमिश भी डालते हैं. इस खीर को बनाने के बाद रात में साफ बर्तन में ढककर खुले स्थान पर रखा जाता है, जहां चंद्रमा की रोशनी पहुंच सके.
अगले दिन सुबह इसे भगवान को भोग लगाने के बाद परिवार के लोग खाते हैं. Sharad Purnima Kheer का महत्व केवल इसके स्वाद में नहीं, बल्कि इससे जुड़ी भावनाओं में भी है. कई परिवारों में यह परंपरा दादी-नानी के समय से चली आ रही है और आज की पीढ़ी भी इसे आगे बढ़ा रही है.
बक्सर में भी निभाई जाती है चांदनी में खीर रखने की परंपरा
बिहार के बक्सर जिले में भी शरद पूर्णिमा को लेकर लोगों में खास उत्साह रहता है. यहां कई घरों में रात के समय खीर तैयार कर उसे चंद्रमा की रोशनी में रखा जाता है. चरित्रवन निवासी अधिवक्ता प्रणेश शर्मा बताते हैं कि पहले उन्हें इस परंपरा के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी. पत्नी के आने के बाद उनके घर में Sharad Purnima Kheer को चांदनी में रखने की परंपरा शुरू हुई, जिसका अब हर साल पालन किया जाता है. उनके अनुसार, धार्मिक मान्यता अपनी जगह है, लेकिन चांदनी में रखी खीर का स्वाद उन्हें सामान्य दिनों की खीर से अलग लगता है. परिवार के सभी लोगों के साथ बैठकर इसे खाना इस पर्व को और खास बना देता है.
Sharad Purnima Kheer और स्वास्थ्य से जुड़ी बातें
आयुर्वेदाचार्य वेद प्रकाश के अनुसार, भारतीय परंपराओं में चंद्रमा की रोशनी को लंबे समय से विशेष महत्व दिया गया है. इसी कारण शरद पूर्णिमा की रात खीर रखने की मान्यता चली आ रही है. हालांकि, खीर को चांदनी में रखने से उसमें विशेष औषधीय गुण आने या रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने की बात को साबित करने के लिए अभी पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं हैं. दूध और चावल से बनी खीर शरीर को ऊर्जा देने वाला भोजन हो सकती है. इसमें मौजूद दूध से कैल्शियम और अन्य पोषक तत्व मिलते हैं, जबकि चावल शरीर को ऊर्जा देता है. इसलिए यह एक स्वादिष्ट और पौष्टिक मिठाई जरूर मानी जा सकती है.
Sharad Purnima Kheer रखने का सही समय और पूजा विधि
आचार्य अमरेंद्र कुमार मिश्र के अनुसार, पूर्णिमा तिथि रविवार को दिन में 11:05 बजे शुरू होकर सोमवार सुबह 9:57 बजे तक रहेगी. इस आधार पर रविवार को शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा और सोमवार को स्नान-दान की परंपरा निभाई जाएगी. शरद पूर्णिमा की रात श्रद्धालु चंद्रमा की पूजा करते हैं. इसके बाद खीर को खुले आसमान के नीचे रखा जाता है. सुबह स्नान और पूजा के बाद परिवार के लोग इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं.
आज के समय में भी Sharad Purnima Kheer की परंपरा लोगों को अपनी संस्कृति और परिवार से जोड़ने का काम कर रही है. आधुनिक जीवन की भागदौड़ के बीच यह पर्व घर में साथ बैठने और पुरानी परंपराओं को याद करने का अवसर देता है. शरद पूर्णिमा की रात की चांदनी, घर में बनी खीर और परिवार के साथ बिताया गया समय इस त्योहार को खास बनाते हैं. यही वजह है कि वर्षों पुरानी यह परंपरा आज भी लोगों के बीच उतनी ही लोकप्रिय बनी हुई है.

