Rewti Raman
पलामू : जिले के नीलांबर–पितांबरपुर के बसौरा स्थित सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में मेस के गुणवत्तापूर्ण भोजन न मिलने के बाद उठे विवाद का अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है.विदित हो कि बीते 17 सितंबर को छात्रों में भोजन की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े किए थे. इसके साथ ही पूरे दिन धरना पर बैठ गए थे.देर शाम तक हंगामा होने के बाद पलामू डीसी ने संज्ञान लेते हुए प्रशासनिक टीम को मौके पर भेजा था. कॉलेज प्रशासन ने 30 सितंबर तक मेस वेंडर तथा अन्य व्यवस्था में बदलाव करने का आश्वासन दिया था.
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छात्रों के हंगामे के बाद प्रशासन ने 30 सितंबर तक व्यवस्था में सुधार और बकाया भुगतान के निपटारे का भरोसा दिया था.लेकिन अक्टूबर बीत जाने के बाद भी वर्तमान मेस वेंडर को नहीं बदला गया है. छात्रों का कहना है कि हंगामे के बाद मेस की व्यवस्था में थोड़ा-बहुत सुधार जरूर किया गया है, लेकिन स्थिति जस की तस्वीर बनी हुई है.उनकी सबसे प्रमुख मांग वर्तमान मेस वेंडर को हटाने की थी छात्रों का आरोप है कि इस मांग पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.
प्रशासन के आश्वासन पर शांत हुए थे छात्र
मामले की जानकारी मिलने के बाद सदर एसडीएम संजय पांडेय, सीओ जागो महतो और फूड सेफ्टी की टीम देर शाम कॉलेज पहुंची थी. सदर एसडीएम ने छात्रों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनी थीं और मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया था.इसके बअलावा फूड सेफ्टी की टीम ने भोजन और खाद्य सामग्री के सैंपल लिये थे. सैंपल की जांच के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई का भरोसा दिया गया था.फूड सेफ्टी टीम द्वारा सैंपल लिये जाने और प्रशासन की ओर से कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद छात्रों ने हंगामा समाप्त कर दिया था. इसके बाद सभी छात्र अपने-अपने हॉस्टल लौट गये थे.
प्रशासनिक टीम ने कई बिंदुओं पर पाई थी खामियां
मेस विवाद के बाद प्रशासनिक टीम ने कॉलेज पहुंचकर मेस का निरीक्षण किया था.जांच के दौरान करीब दो दर्जन बिंदुओं पर खामियां पाई गई थी.इस दौरान रसोई, बर्तन, साफ-सफाई और सैनिटाइजेशन समेत कई बिंदुओं पर कमियां सामने आने की बात कही गयी थी. मेस से चावल, दाल और लाल मिर्च के नमूने भी जांच के लिए स्टेट फूड लैब, नामकुम रांची भेजे गये थे.इसके बाद छात्रों को उम्मीद थी कि तय समय-सीमा के भीतर मेस वेंडर को बदलने की दिशा में कार्रवाई होगी.लेकिन 30 सितंबर की समय-सीमा बीतने के बाद भी स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं हुआ है.
वेंडर ना बदले जाने से छात्र खासे निराश
छात्रों का कहना है कि यदि मेस में पहले ही भोजन को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आ चुकी हैं.तो टेंडर प्रक्रिया पूरी होने तक वर्तमान व्यवस्था को लेकर क्या वैकल्पिक इंतजाम किया गया है.छात्रों के मुताबिक उनकी शिकायत केवल वेंडर बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित व गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना भी कॉलेज प्रशासन की जिम्मेदारी है. अब सवाल यह है कि जब 30 सितंबर तक सुधार का भरोसा दिया गया था, तो समय-सीमा बीतने के बाद भी वेंडर बदलने की प्रक्रिया शुरू होने में इतना समय क्यों लग रहा है. फिलहाल छात्र नये वेंडर के चयन और मेस व्यवस्था में स्थायी सुधार का इंतजार कर रहे हैं.
टेंडर प्रक्रिया में महीनों इंतजार
महाविद्यालय के सुपरिंटेंडेंट मुरली मनोहर ने बताया कि वर्तमान मेस वेंडर को बदलने के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी करनी होगी. पूरी प्रक्रिया को अंजाम देने में कम से कम एक महीने का समय लग सकता है. प्रक्रिया पूरी होने के बाद नये वेंडर का चयन किया जाएगा.
इधर छात्रों का कहना है कि नया वेंडर आने में समय लग सकता है, लेकिन तब तक वर्तमान मेस व्यवस्था में भोजन की गुणवत्ता और साफ-सफाई सुनिश्चित करना कॉलेज प्रशासन की जिम्मेदारी है. छात्रों ने मेस में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता पर नियमित निगरानी की मांग की है. अब छात्रों की नजर टेंडर प्रक्रिया और नये वेंडर के चयन पर है।


