News Desk: हर साल 31 अक्टूबर को दुनिया के कई देशों में हैलोवीन मनाया जाता है. इस दिन घरों के बाहर कद्दू पर डरावने चेहरे बनाए जाते हैं और उन्हें रोशनी के साथ सजाया जाता है. लेकिन ये सिर्फ सजावट नहीं है, इसके पीछे एक दिलचस्प और पुरानी कहानी छिपी है. हैलोवीन की शुरुआत करीब 2000 साल पहले यूरोप के सेल्टिक लोगों के ‘सौवेन’ त्योहार से मानी जाती है. माना जाता था कि इस दिन जीवित और मृत लोगों की दुनिया के बीच की दूरी कम हो जाती है. इसी वजह से लोग आत्माओं से बचने के लिए अजीब कपड़े पहनते थे और घरों के बाहर रोशनी करते थे.
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‘जैक-ओ-लैनटर्न’ की कहानी
आयरलैंड की एक पुरानी कहानी में ‘स्टिंजी जैक’ नाम के आदमी का जिक्र मिलता है. कहा जाता है कि जैक ने चालाकी से शैतान को अपने वश में कर लिया था. उसने शैतान से वादा करवाया कि वह उसे कभी नुकसान नहीं पहुंचाएगा. जब जैक की मौत हुई तो उसे न स्वर्ग में जगह मिली और न ही नरक में. ऐसे में उसे भटकने की सजा मिली. अंधेरे में रास्ता देखने के लिए उसे जलता हुआ कोयला दिया गया, जिसे उसने एक खोखले सब्जी में रखकर लालटेन बना लिया. यहीं से ‘जैक-ओ-लैनटर्न’ की शुरुआत मानी जाती है.
कद्दू का कनेक्शन
शुरुआत में लोग कद्दू नहीं, बल्कि शलजम में डरावने चेहरे बनाते थे. लेकिन जब आयरलैंड के लोग अमेरिका पहुंचे, तो वहां शलजम कम और कद्दू ज्यादा मिलते थे. कद्दू बड़े और आसानी से काटे जा सकते थे, इसलिए धीरे-धीरे वही ‘जैक-ओ-लैनटर्न’ का हिस्सा बन गए. आज के समय में कद्दू पर डरावना चेहरा बनाना हैलोवीन की पहचान बन चुका है. लोग इसे सजावट के तौर पर इस्तेमाल करते हैं. माना जाता है कि इससे नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं. कद्दू पर बना ये डरावना चेहरा सिर्फ एक डिजाइन नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा और कहानी का हिस्सा है, जो आज भी लोगों को जोड़कर रखती है.


