झारखंड कांग्रेस ने सोमवार, 28 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर रांची में प्रदर्शन किया। पार्टी के हजारों कार्यकर्ताओं ने पुराना विधानसभा मैदान से झारखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला। प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस के नेताओं के साथ विधायक, मंत्री और पार्टी के अलग-अलग प्रकोष्ठों के कार्यकर्ता भी शामिल हुए। कांग्रेस ने राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन का ऐलान भी किया था।
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Election Commission कार्यालय के बाहर बढ़ा तनाव
रांची में पैदल मार्च के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता CEO कार्यालय के बाहर पहुंचे। यहां प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने कार्यालय के गेट की ओर बढ़ने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाया। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ता गेट के पास ही धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन के दौरान CEC ज्ञानेश कुमार का पुतला भी जलाया गया। मूल रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस वक्त ज्यादा तनावपूर्ण हुई जब कुछ कार्यकर्ताओं ने गेट तोड़ने की कोशिश की।
Election Commission पर कांग्रेस नेताओं ने लगाए गंभीर आरोप
प्रदर्शन के दौरान झारखंड सरकार के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आरोप लगाए और उनके इस्तीफे की मांग की। प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने भी Election Commission की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने भी CEC पर आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि कांग्रेस का आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। विधायक राजेश कच्छप ने भी CEC के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। ये सभी बातें प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं की ओर से कही गईं और इन्हें उनके राजनीतिक आरोपों के रूप में देखा जाना चाहिए।
Election Commission में 14 लिखित आपत्तियों की रिपोर्ट से गरमाया विवाद
ज्ञानेश कुमार को लेकर मौजूदा राजनीतिक विवाद की एक बड़ी वजह Election Commission के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ी हालिया रिपोर्ट है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीने के दौरान आयोग के फैसलों और आदेशों को लेकर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। इन आपत्तियों में मतदाता सूची, नए मतदाताओं के नाम जोड़ने और नाम हटाने की प्रक्रिया, SIR और चुनावी डेटा से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की जानकारी CEC ज्ञानेश कुमार को भी दी गई थी। इसी रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव Election Commission की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और CEC के इस्तीफे की मांग तेज की।
Election Commission ने रिपोर्ट पर क्या कहा?
वहीं चुनाव आयोग ने इन रिपोर्ट्स में उठाए गए सवालों पर अपना पक्ष भी रखा है। आयोग की ओर से कहा गया कि आंतरिक विचार-विमर्श के दौरान सवाल, सुझाव या आपत्तियां उठना बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था की सामान्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने यह भी कहा कि SIR समेत पिछले एक साल में लिए गए फैसले पूरे आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
यानी एक तरफ मीडिया रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज की गई आपत्तियों का जिक्र है, तो दूसरी तरफ चुनाव आयोग इन मतभेदों को सामान्य आंतरिक प्रक्रिया बताते हुए अपने फैसलों को सर्वसम्मत बता रहा है। यही अंतर इस पूरे विवाद का अहम हिस्सा है।
26 सितंबर को हुई तीनों चुनाव आयुक्तों की बैठक
विवाद के बीच 26 सितंबर को CEC ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की बैठक भी हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, बैठक में उन मुद्दों पर चर्चा हुई जिनको लेकर पिछले महीनों में आपत्तियां दर्ज की गई थीं।
इस बैठक के बाद चुनाव आयोग से जुड़े कुछ प्रशासनिक और तकनीकी मुद्दों पर फैसले भी सामने आए। इनमें मतदाता पंजीकरण फॉर्म, चुनावी डेटा तक पहुंच और आयोग के IT सिस्टम की निगरानी जैसे विषय शामिल थे।
SIR को लेकर झारखंड कांग्रेस पहले भी उठा चुकी है सवाल
झारखंड में कांग्रेस का विरोध सिर्फ CEC के इस्तीफे की मांग तक सीमित नहीं है। पार्टी SIR यानी Special Intensive Revision को लेकर भी अपनी आपत्तियां दर्ज करा चुकी है। 22 सितंबर को कांग्रेस ने झारखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन देकर SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर चिंता जताई थी।
अब 28 सितंबर के प्रदर्शन के साथ SIR, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग झारखंड की राजनीति में एक साथ चर्चा के केंद्र में आ गई है।
फिलहाल इस पूरे विवाद में दो पक्ष साफ तौर पर सामने हैं। कांग्रेस Election Commission की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए CEC के इस्तीफे की मांग कर रही है, जबकि चुनाव आयोग ने आंतरिक आपत्तियों को सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए SIR समेत अपने फैसलों को सर्वसम्मत बताया है।


