यूपी: कानपुर में चीनी के दाम में गिरावट साफ नजर आ रही है। फुटकर बाजार में चीनी का भाव 55 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है, जबकि थोक बाजार में नंबर वन चीनी 49 रुपये और सादा चीनी 47 रुपये प्रति किलो के दाम पर बिक रही है।
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चीनी के दाम लगातार कम होने की वजह से सोमवार को शकरपट्टी के थोक बाजार में कारोबार धीमा रहा। फुटकर दुकानदारों ने भी ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने के बजाय जरूरत के हिसाब से ही माल लिया। थोक कारोबारियों के मुताबिक, चीनी मिलों से मिलने वाली कीमतों में लगातार गिरावट आ रही है। बलरामपुर समेत प्रमुख मिलों में रिफाइंड चीनी करीब 4,600 रुपये प्रति क्विंटल और सादी चीनी करीब 4,450 रुपये प्रति क्विंटल के भाव में बिक रही है।
चीनी पर 5 प्रतिशत GST लगने के बाद प्रति क्विंटल कीमत में करीब 230 से 250 रुपये तक बढ़ोतरी हो जाती है। इसके अलावा भाड़ा, मजदूरी और मिल से जुड़े दूसरे खर्च भी जुड़ जाते हैं। इससे थोक बाजार में नंबर वन चीनी की कीमत करीब 49 से 50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच रही है। फुटकर दुकानदारों का कहना है कि उन्हें थोक में ही चीनी 50 रुपये किलो से ज्यादा की पड़ रही है। ऐसे में उनके लिए चीनी को 55 रुपये प्रति किलो से कम में बेचना मुश्किल हो रहा है।
फुटकर दुकानदारों के मुताबिक, बोरी से चीनी निकालकर बेचने के दौरान हर बोरी में करीब 1.5 से 2 किलो तक चीनी कम हो जाती है। इसके अलावा पैकिंग और मजदूरी का खर्च भी दुकानदारों को देना पड़ता है। इन अतिरिक्त खर्चों और चीनी की छीजत के कारण ही थोक और फुटकर कीमतों में अंतर बना हुआ है। जाजमऊ का पुराना गंगा पुल बंद होने का असर अब सिर्फ आम लोगों की आवाजाही पर नहीं, बल्कि माल ढुलाई पर भी पड़ रहा है। भारी वाहनों को दूसरे रास्तों से भेजा जा रहा है। इसके कारण ट्रकों को कानपुर पहुंचने के लिए करीब 122 किलोमीटर ज्यादा दूरी तय करनी पड़ रही है।
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि 122 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करने से सिर्फ डीजल का खर्च ही नहीं बढ़ रहा है, बल्कि ड्राइवर का समय, गाड़ी की देखभाल और दूसरे खर्च भी बढ़ रहे हैं। ट्रांसपोर्टर आदित्य तिवारी के मुताबिक, अगर करीब तीन महीने तक यही स्थिति रही तो माल ढुलाई का कारोबार प्रभावित हो सकता है। आगे चलकर बढ़ा हुआ ट्रांसपोर्ट खर्च सामान की कीमतों में भी जुड़ सकता है, जिससे आम लोगों पर महंगाई का असर पड़ सकता है।


