Wednesday, November 4, 2026

JPSC नियुक्ति रद्द मामले में सरकार ने मांगी 4 सप्ताह की मोहलत, हाईकोर्ट ने कहा- 48 घंटे में दें जवाब

रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने 11वीं से 13वीं JPSC, CDPO और फूड सेफ्टी ऑफिसर नियुक्तियों को रद्द करने के मामले में राज्य सरकार से 48 घंटे में जवाब मांगा है. मामले में पूर्व में दिए गए अपने अंतरिम आदेश को बरकरार रखते हुए मंगलवार को जस्टिस दीपक रौशन की कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई. इस दौरान हालांकि राज्य सरकार ने चार सप्ताह की मोहलत कोर्ट से मांगी, लेकिन कोर्ट ने समय देने से इनकार कर दिया. अब मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी. मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने पक्ष रखा.

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सुनवाई के दौरान सरकार ने मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय देने की मांग की लेकिन कोर्ट ने सरकार को इतनी लंबी अवधि देने से मना कर दिया. अदालत ने जवाब दाखिल करने के लिए सिर्फ दो दिन की समय-सीमा तय की है. कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, राज्य सरकार को अपनी स्टेटस रिपोर्ट आज ही सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष पेश करनी है. इस रिपोर्ट के आधार पर मामले की अगली सुनवाई में आगे की स्थिति पर चर्चा होगी.

मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स और चंचल जैन समेत अन्य वकीलों ने बहस की. वहीं, राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता और JPSC की ओर से अधिवक्ता संजोय पिपरवाल ने पक्ष रखा. सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट की वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता ने बहस की. उनकी ओर से स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय देने का आग्रह किया, सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से सीआईडी की जांच को धीमा बताते हुए कहा कि सरकार ने तुगलकी फरमान निकाल कर नियुक्तियां रद्द कर दी. सरकार की ओर से समय मांगे जाने पर कोर्ट ने कहा कि दिन में नहीं बल्कि घंटो में समय मिलेगा.

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जेएसएससी सीजीएल मामले में सुनवाई

इससे पहले JSSC-CGL परीक्षा रद्द मामले में भी मंगलवार को हाईकोर्ट ने सुनवाई की. सरकार के फैसले पर झारखंड हाईकोर्ट ने अपनी रोक को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार को 48 घंटों में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया.  सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपक रौशन की कोर्ट ने कहा- यह कई लोगों के भविष्य का मामला, 48 घंटे में जवाब दे सरकार, पुलिस पर पूरा भरोसा है लेकिन जांच सुस्त क्यों ? हाईकोर्ट में नीरज कुमार खेस, रमेश उरांव एवं अन्य की ओर से दायर याचिका में प्रार्थियों की ओर से राज्य के पूर्व महाधिवक्ता राजीव रंजन, अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, कुमार हर्ष, अमृतांश वत्स, दीपांकर राय, अर्पण मिश्रा और अंकित विशाल ने पक्ष रखा.

एयर नाऊ स्पेशल

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