धर्म : सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए बेहद खास माना जाता है. इस दौरान हर शिव मंदिर में लाखों भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है. उत्तरप्रदेश में भगवान शिव के भी कई प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर है. इन मंदिरों से जुड़ी कई मान्यताएं और धार्मिक कहानियाँ हैं जो हमें जरूर जानना चाहिए.
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आगरा के बटेश्वर महादेव
उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से लगभग 70 किमोलमेटेर दूर यमुना नदी के तट पर स्थित है बटेश्वर महादेव का मंदिर. यह मांदिर भगवान शिव का एक आति प्राचीन और प्रसिद्ध धाम है. इस मंदिर का निर्माण 17वीं-18वीं शताब्दी में भदावर के राजाओं के द्वारा हुआ था.
वृंदावन के गोपेश्वर महादेव
गोपेश्वर महादेव मंदिर वृंदावन के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है और यह यमुना नदी के निकट स्थित है. माना जाता है कि भगवान शिव ने स्त्री का रूप धारण किया था ताकि वे भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी का रास लीला देख सकें. यह मंदिर भगवान श्री कृष्ण के परपोते व्रजनाभ द्वारा स्थापित शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है. यह मंदिर प्रकृति की पुरुष और स्त्री शक्तियों के संगम का प्रतीक है.
अयोध्या के नागेश्वरनाथ महादेव
आयोध्य के प्रसिद्ध नागेश्वरनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक आति प्राचीन और पवित्र स्थल है. यह मंदिर राम की पौड़ी के पास सरयू नदी के तट पर स्थित है. पौराणिक मान्यता के अनुसार इस मंदिर में शिवलिंग की स्थापना भगवान श्री राम के छोटे पुत्र कुश ने करवाया था.
मेरठ के औंघड़नाथ महादेव
औंघड़नाथ मंदिर उत्तर प्रदेश राज्य के मेरठ महानगर में छावनी क्षेत्र में स्थित है. यह मान्यता है कि इस मंदिर में शिवलिंग स्वयंभू है, यानि यहाँ शिवलिंग स्वयं पृथ्वी से बाहर निकला है. और भक्तों की मनोकामनाएं औंघड़दानी शिव स्वरूप में पूरी करने के साथ साथ शांति का संदेश भी देते हैं. इसके साथ ही नटराज स्वरूप में क्रांति को भी प्रकाशित करते हैं. इसे काली पल्टन वाला मंदिर भी कहा जाता है।
कन्नौज के गौरी शंकर महादेव
गौरी शंकर मंदिर कन्नौज में स्थित एक आति प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर है. यह मंदिर भगवान शिव और माता पार्वती यानि (गौरी) को समर्पित है, जहाँ स्वयंभू शिवलिंग के साथ संपूर्ण शिव परिवार विराजमान माना जाता है. यह मंदिर लगभग 1600 साल पुराना है और यहाँ शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ था. इस मंदिर का निर्माण राजा हर्षवर्धन के काल में हुआ था. इस मंदिर में गौरी शंकर को अर्धनारीश्वर रूप में देखा और पूजा जाता है.
महाराजगंज के हटहिया महादेव
महाराजगंज के जिले में निचलौल क्षेत्र के पास स्थित हटिहा शिव मंदिर या हटहिया धाम का एक बेहद प्रसिद्ध और प्राचीन पंचमुखी महादेव मंदिर है. इसे “पूर्वांचल का मिनी बाबा धाम” भी कहा जाता है, जहाँ सावन और नाग पंचमी के दौरान भारी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए आते हैं. माना जाता है कि लगभग 200 साल पहले एक आम के पेड़ की खुदाई के दौरान यह स्वयंभू पंचमुखी शिवलिंग प्रकट हुआ था. लोक मान्यता है कि यहाँ एक गाय जंगल में एक खास जगह पर खुद-ब-खुद दूध अर्पित करती थी, जिसके बाद इस पवित्र स्थान का पता चला. इस मंदिर में उत्तर प्रदेश, बिहार के साथ-साथ पड़ोसी देश नेपाल से भी भक्त दर्शन के लिए पहुँचते हैं.

