Thursday, November 5, 2026

झारखंड विधान सभा में “77वाँ राज्यव्यापी वन महोत्सव”, विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो और मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन हुए शामिल

रांची: विधान सभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो और मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन मंगलवार को झारखंड विधान सभा परिसर में आयोजित “77वाँ राज्यव्यापी वन महोत्सव, 2026” कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर विधान सभा अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस मौके पर विधायक कल्पना सोरेन, मंत्री राधाकृष्ण किशोर, मंत्री हफीजुल हसन, मंत्री इरफान अंसारी, मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की समेत कई अन्य विधायक भी उपस्थित थे.

विधान सभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने अपने संबोधन में राज्यव्यापी वन महोत्सव कार्यक्रम के उद्देश्य एवं प्राकृतिक तथा पर्यावरण संरक्षण की महत्ता को लेकर विस्तृत प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विधान सभा परिसर में पौधारोपण किया और सभी से अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज लगाया गया एक पौधा आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन, स्वच्छ हवा और सुरक्षित पर्यावरण का उपहार है।

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केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं

महोत्सव में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि झारखंड की पहचान जल, जंगल, पहाड़, नदियां और समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों से है। जंगल और प्रकृति यहां के जनजीवन एवं संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है, इसलिए पर्यावरण का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन महोत्सव जैसे कार्यक्रम हमें प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का स्मरण एवं अहसास कराते हैं। हमें केवल पौधा लगाने तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि लगाए गए पौधों की देखभाल और उनके संरक्षण का भी संकल्प लेना होगा। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य के लिए आज पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वन संरक्षण, हरित क्षेत्र के विस्तार, जल संरक्षण तथा पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए झारखंड की प्राकृतिक विरासत को संरक्षित रखना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन 

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति सभी लोग योगदान दें। पौधा लगाने के साथ-साथ उसे संरक्षित करने का भी महोत्सव होना चाहिए। पौधा लगाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उनके संरक्षण और संवर्धन के प्रति भी समान उत्साह होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वन महोत्सव का परिणाम है कि आज झारखंड विधानसभा परिसर, उसके आसपास एवं संपूर्ण झारखंड में अनेक हरे-भरे वृक्ष दिखाई दे रहे हैं। धरती हरा-भरा हो रहा है।

उन्होंने आमलोग से भी अपील किया कि पौधा लगाकर हरा-भरा धरती बनाने में हम सभी को अपनी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि वन महोत्सव जैसे कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन के प्रति समाज में जागरूकता के लिए अत्यंत आवश्यक है। हम व्यक्तिगत रूप से इस मुहिम से जुड़ेंगे, तो इस विशाल धरा और इसकी जैव-विविधता की रक्षा करना आसान हो जायेगा।

सजगता और सक्रियता जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि ​प्रायः यह देखा जाता है कि विकास के नाम पर हम कई कार्य करते हैं। विकास की प्रक्रिया में पर्यावरण को नुकसान पहुँचते हैं। इससे पर्यावरण में असंतुलन पैदा होता है। इससे संपूर्ण मानव जीवन और समस्त जीव-जंतु प्रभावित होते हैं। मनुष्य से लेकर पशु- पक्षी आदि प्रत्येक प्राणी पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए हमसभी को इस नुकसान की शीघ्र भरपाई करनी चाहिए। ​

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण को लेकर बड़ी-बड़ी गोष्ठी व चर्चाएं होती हैं, परंतु नुकसान की भरपाई मुश्किल होता है। ​उन्होंने समाचार पत्रों के माध्यम से इटली के एक अति प्राचीन ज्वालामुखी को पुनः सक्रिय होने संबंधी समाचार का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं स्पष्ट संकेत देते हैं कि पर्यावरण का क्षरण केवल वृक्ष काटने तक सीमित नहीं है, और न ही पौधरोपण से पूर्ण भरपाई संभव है। ​

प्रकृति में जो उथल-पुथल हो रहे हैं, उसकी भरपाई हमें हर स्तर पर करनी होगी अन्यथा आने वाला समय मानव जीवन के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण होगा। हम सभी वृक्षों को कटाते हैं, खनिज संपदा का दोहन कर रहे हैं, भू-जल का अत्यधिक निष्कर्षण कर रहे हैं और बाँध बनाकर नदियों के प्रवाह को रोक रहे हैं। प्रकृति के प्रति यह शोषण निरंतर बढ़ रहा है। देश व राज्य की जनसंख्या बढ़ रही है। यह जनसंख्या प्राकृतिक संसाधनों पर टूट पड़ेंगे, तो इससे होने वाले दुष्परिणामों का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। अतः आज हमें अत्यंत सजगता और सक्रियता के साथ कार्य करने की आवश्यकता है।

आवासीय परिसर में पौधरोपण करें

मौके पर ही मुख्यमंत्री ने वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि विधायकगणों के आवासीय परिसर में भी फलदार पौधों का रोपण हो। इसके लिए सभी विधायकगणों को फलदार पौधा उपलब्ध कराकर उसका रोपन कराये जाएं, ताकि धरती में हरीयाली लाई जा सके।

एयर नाऊ स्पेशल

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