रांची : पिठौरिया चौक स्थित नया तालाब आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। कभी क्षेत्र की धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा यह तालाब आज गंदगी और अतिक्रमण की समस्या से जूझ रहा है। इस तालाब से न केवल धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है, बल्कि इसकी पौराणिक मान्यताएं भी वर्षों पुरानी हैं। क्षेत्र में आयोजित होने वाले विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान और प्रतिमा विसर्जन की परंपरा लंबे समय से इसी तालाब से जुड़ी रही है।
Highlights:
इसे भी पढ़ें: देवघर में नेल पॉलिश फैक्ट्री में लगी आग, पांच घंटे बाद फॉयर बिग्रेड पाया गया काबू
लेकिन वर्तमान में तालाब के पानी की स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि इंसान तो दूर, जानवर भी इस पानी में स्नान करने से कतरा रहे हैं। तालाब का पानी दूषित होने के कारण इसकी उपयोगिता और धार्मिक महत्व दोनों प्रभावित हो रहे हैं। इसके बावजूद तालाब की साफ-सफाई और अतिक्रमण हटाने की दिशा में अब तक ठोस पहल नहीं होने से स्थानीय ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
10 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं
तालाब की बदहाल स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों ने बीते 26 अक्टूबर को रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री को लिखित आवेदन सौंपकर तालाब की साफ-सफाई कराने और अतिक्रमण मुक्त करने की मांग की थी। आवेदन दिए करीब 10 दिन बीत चुके हैं, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई है।
धार्मिक आस्था से जुड़े तालाब की अनदेखी क्यों?
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि नया तालाब केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि पिठौरिया क्षेत्र की धार्मिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। वर्षों से यहां धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान प्रतिमाओं का विसर्जन होता आया है। ऐसे महत्वपूर्ण तालाब की बदहाली क्षेत्रवासियों के लिए चिंता का विषय है।
ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से सवाल उठाया है कि जनहित से जुड़े इस गंभीर मामले में अब तक संज्ञान क्यों नहीं लिया गया? आखिर आवेदन मिलने के बाद भी संबंधित विभाग को जांच और कार्रवाई के निर्देश क्यों नहीं दिए गए?
ग्रामीणों की मांग है कि जिला प्रशासन अविलंब तालाब का निरीक्षण कराए, पानी की सफाई एवं संरक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करे तथा अतिक्रमण की जांच कर नियमानुसार उसे हटाए, ताकि पिठौरिया की इस धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहर को बचाया जा सके।

