रांची: राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने शनिवार को राँची के चुटिया स्थित इक्कीसो महादेव स्थान में राँची नगर निगम द्वारा ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत आयोजित ‘सखुआ महोत्सव-2026’ के उद्घाटन के अवसर को संबोधित करते हुए पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक कम-से-कम एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प ले, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है। इस अवसर पर उन्होंने राँची नगर निगम द्वारा नगर निगम क्षेत्र के सभी 65 वार्डों में लगभग एक लाख सखुआ के पौधे लगाने के संकल्प की सराहना की।
राज्यपाल महोदय ने कहा कि सखुआ का वृक्ष झारखण्ड की प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं जनजातीय पहचान का अभिन्न हिस्सा है। झारखण्ड की जनजातीय परंपराएँ सदैव प्रकृति के संरक्षण और उसके साथ संतुलित जीवन का संदेश देती रही हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के लिए जल, जंगल और जमीन केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति और आस्था के आधार हैं। इसलिए अपनी प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण हम सभी का सामूहिक दायित्व है।
राज्यपाल ने कहा कि ‘सखुआ महोत्सव’ प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता तथा भावी पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है। झारखण्ड अपने घने वनों, समृद्ध जैव विविधता, नदियों, पर्वतों तथा जनजातीय सांस्कृतिक विरासत के कारण विशिष्ट पहचान रखता है। विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए इस प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा प्रारंभ किया गया ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान माँ के प्रति सम्मान के साथ-साथ प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और आने वाली पीढ़ियों के प्रति दायित्वबोध का संदेश देता है। यदि प्रत्येक नागरिक अपने जीवन में कम-से-कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल का संकल्प ले, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में व्यापक परिवर्तन लाया जा सकता है।
राज्यपाल ने कहा कि आज पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान, जल संकट एवं पर्यावरणीय असंतुलन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए वृक्षारोपण महत्वपूर्ण है, लेकिन केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है। लगाए गए प्रत्येक पौधे का संरक्षण कर उसे वृक्ष के रूप में विकसित करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने युवाओं, स्वयं सहायता समूहों, सामाजिक संगठनों एवं आम नागरिकों से ‘सखुआ महोत्सव’ को व्यापक जन-अभियान का स्वरूप देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी से चलने वाले ऐसे अभियान पर्यावरण संरक्षण को स्थायी जन-आंदोलन में परिवर्तित कर सकते हैं।
राज्यपाल ने कहा कि जब हम एक पौधा लगाते हैं और उसकी देखभाल करते हैं, तो हम केवल पर्यावरण को बेहतर बनाने का कार्य नहीं करते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, स्वस्थ एवं सुरक्षित भविष्य की नींव रखते हैं। कार्यक्रम के उपरांत माननीय राज्यपाल ने श्री सुरेश्वर महादेव मंदिर, स्वर्णरेखा धाम, केतारी बागान, चुटिया, राँची पहुँचकर पूजा-अर्चना की तथा बाबा भोलेनाथ से झारखण्डवासियों की सुख-समृद्धि, शांति एवं कल्याण की कामना की।


