रामगढ़: दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रथम पुण्यतिथि पर नेमरा में आयोजित श्रद्धांजलि सभा उस समय भावुक हो उठी, जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने संबोधन के दौरान भावनाओं को रोक नहीं सके। 14 फीट ऊंची प्रतिमा के अनावरण के अवसर पर उन्होंने कहा कि यह केवल उनके परिवार का नहीं, बल्कि पूरे झारखंड का ऐसा दुख है जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि जिस दिन दिशोम गुरु ने अंतिम सांस ली, उसी दिन झारखंड ने अपने सबसे बड़े जननायकों में से एक को खो दिया।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि आज राज्य के कोने-कोने से लोग दिशोम गुरु को श्रद्धांजलि देने पहुंचे हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि उन्होंने लोगों के दिलों में जो स्थान बनाया, वह आज भी अटूट है। उन्होंने कहा कि कुछ ताकतें समाज को बांटने और लोगों के बीच नफरत फैलाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन झारखंड की पहचान हमेशा एकता, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की रही है। ऐसे लोगों का जवाब केवल एकजुट होकर ही दिया जा सकता है।

हेमंत सोरेन ने कहा कि नेमरा में स्थापित दिशोम गुरु की 14 फीट ऊंची प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को केवल एक महान नेता की याद नहीं दिलाएगी, बल्कि उन्हें झारखंड के संघर्ष, बलिदान और स्वाभिमान के इतिहास से भी परिचित कराएगी। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को यह जानना जरूरी है कि आजादी के बाद भी इस क्षेत्र के लोगों ने शोषण और उपेक्षा झेली तथा अपने अधिकारों के लिए लंबा संघर्ष किया।

अपने संबोधन के सबसे भावुक क्षण में मुख्यमंत्री ने अपने परिवार के दर्द को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि समारोह स्थल के पास ही उनके दादा की समाधि है, जिनकी असामाजिक तत्वों ने हत्या कर दी थी। उन्होंने कहा कि उस समय उनका जन्म भी नहीं हुआ था, लेकिन आज भी समाज में वैसी सोच रखने वाले लोग मौजूद हैं। इसलिए समाज को नफरत नहीं, बल्कि प्रेम, सम्मान और भाईचारे के रास्ते पर आगे बढ़ना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिशोम गुरु का पूरा जीवन जल, जंगल, जमीन और आदिवासी-मूलवासी समाज के अधिकारों की लड़ाई को समर्पित रहा। उनके संघर्ष, विचार और आदर्श झारखंड की आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनकर हमेशा जीवित रहेंगे। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि दिशोम गुरु के सपनों का झारखंड बनाने के लिए सभी को एकजुट होकर आगे बढ़ना होगा।


