राँची : झारखंड सरकार के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं आदिम जनजाति कल्याण विभाग तथा यूनिवर्सिटी पॉलिटेक्निक, बीआईटी मेसरा के बीच प्रोजेक्ट भवन में एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते से झारखंड के सुदूरवर्ती क्षेत्रों से आने वाले अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के मेधावी किंतु आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए उच्चस्तरीय व्यावसायिक शिक्षा सुलभ हो सकेगा।
Highlights:
इस समझौते पर कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने खुशी जताते हुए कहा कि यह समझौता झारखंड के आर्थिक रूप से कमजोर एससी, एसटी व ओबीसी के मेधावी विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा तक समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। एमओयू पर झारखंड सरकार की ओर से कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव जावेद अनवर इदरीसी तथा बीआईटी मेसरा के यूनिवर्सिटी पॉलिटेक्निक की निदेशक डॉ. विजया लक्ष्मी ने हस्ताक्षर किए।
इसे भी पढ़ें : झारखंड शराब घोटाला मामले में ACB की जांच तेज, IAS अमित प्रकाश समेत 3 अधिकारियों को समन, 4 अगस्त को होगी पूछताछ
मौके पर ये रहे मौजूद
इस मौके पर कल्याण विभाग के सचिव के. एन. झा, संयुक्त सचिव जावेद अनवर इदरीसी, बीआईटी मेसरा के कुलपति प्रो. इंद्रनील मन्ना, कुलसचिव डॉ. राजेश जैन, डीन एकेडमिक डॉ. मनीष कुमार मौजूद रहे। वहीं, यूनिवर्सिटी पॉलिटेक्निक के प्रतिनिधिमंडल में निदेशक डॉ. विजया लक्ष्मी, सहायक कुलसचिव सौरभ प्रसाद और वरिष्ठ संकाय सदस्य शामिल थे। समारोह में प्रो. इंद्रनील मन्ना ने सचिव के. एन. झा को यूनिवर्सिटी पॉलिटेक्निक की प्रगति से अवगत कराया।
आर्थिक तंगी नहीं बनेगी बाधा
मौके पर मंत्री ने कहा कि आर्थिक तंगी कभी भी योग्यता के मार्ग में बाधा नहीं बननी चाहिए, झारखंड सरकार ने दस वर्षों की अवधि में ₹79.40 करोड़ (₹7,939.63 लाख) की प्रतिबद्धता व्यक्त की है। सरकार संस्थान के 85% आवर्ती व्यय का वहन करेगी, जिससे प्रतिवर्ष 850 छात्रों को शिक्षण, छात्रावास और भोजन (मेस) की सुविधा पूरी तरह नि:शुल्क प्राप्त होगी। इस योजना की पात्रता मेधा-आधारित होगी, जिसके तहत ₹2.50 लाख से कम वार्षिक पारिवारिक आय वाले छात्र पात्र होंगे।
बीआईटी मेसरा और झारखंड सरकार इस संकल्प पर पूरी तरह एकजुट हैं कि कोई भी योग्य युवा, चाहे वह किसी दूरस्थ वनग्राम से हो, जनजातीय गाँव से हो या आंतरिक ज़िले से, वित्तीय संसाधनों के अभाव में व्यावसायिक अभियांत्रिकी शिक्षा से वंचित न रहे। यह योजना शैक्षणिक सत्र 2025–26 से लागू की जा रही है।
कुलपति प्रो. इंद्रनील मन्ना ने कहा
इस मौके पर बीआईटी मेसरा के कुलपति प्रो. इंद्रनील मन्ना ने कहा “बीआईटी मेसरा पिछले 70 से अधिक वर्षों से अकादमिक उत्कृष्टता, अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक प्रभाव की अपनी विरासत का निर्माण करते हुए लगातार झारखंड और राष्ट्र की सेवा कर रहा है। भारत के अग्रणी तकनीकी संस्थानों में से एक होने के नाते, बीआईटी मेसरा का यह मानना है कि प्रतिभा हर गाँव और हर समुदाय में मौजूद है; आवश्यकता बस युवाओं को अवसर और पहुँच प्रदान करने की है।
झारखंड सरकार के साथ यह ऐतिहासिक साझेदारी राज्य और यहाँ के लोगों के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करती है। साथ मिलकर हम एक ऐसा मार्ग तैयार कर रहे हैं, जिसके माध्यम से योग्य छात्र, अपनी आर्थिक पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना, गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे और कुशल पेशेवरों के रूप में उभरकर देश के साथ-साथ झारखंड के विकास में अपना योगदान देंगे।”
भविष्य की दिशा में कदम बढ़ाते हुए, सरकार और बीआईटी मेसरा ने यूनिवर्सिटी पॉलिटेक्निक के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप तैयार किया है। आने वाले सत्रों में सीटों की क्षमता बढ़ाई जाएगी तथा आईटीआई ट्रेड्स एवं अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की शुरुआत की जाएगी। छात्रों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध, झारखंड सरकार ने यह भी घोषणा की है कि निकट भविष्य में यूनिवर्सिटी पॉलिटेक्निक परिसर में नए छात्रावास ब्लॉक और शैक्षणिक भवनों का निर्माण किया जाएगा, ताकि प्रवेश पाने वाले प्रत्येक छात्र को सीखने और आगे बढ़ने के लिए एक सुरक्षित, सुसज्जित और गरिमापूर्ण वातावरण मिल सके।


