न्यूज़ डेस्क : ईरान के ख़िलाफ़ सिलसिलेवार तरीके से अमेरिकी सेना के 80 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाने के अमेरिकी सेंट्रल कमान (सेंटकॉम) के दावे और उसके बाद ईरान के बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के दावा के बीच अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. इससे पहले सेंटकॉम ने कहा कि यह कार्रवाई होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने वाले कॉमर्शियल जहाजों पर ईरान के हालिया हमलों के जवाब में की गई थी.
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बात करना यानी समय की बर्बादी
नेटो शिखर सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से उन्होंने कहा, ”मेरे हिसाब से यह अब ख़त्म हो चुका है, मैं अब उनसे कोई बातचीत नहीं करना चाहता. वे घटिया लोग हैं”. ट्रंप ने कहा, “जहां तक मेरा सवाल है, यह मामला ख़त्म हो चुका है. उनसे बात करना समय की बर्बादी है. वे झूठ बोलते हैं.” उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्षों के वार्ताकार चाहें तो बातचीत कर सकते हैं, लेकिन ‘वे अपना समय बर्बाद कर रहे हैं.’
मानसिक रूप से बीमार हैं ईरानी नेता
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के वार्ताकारों को लेकर कहा, “वे वास्तव में मानसिक रूप से बीमार हैं. उनके नेता मानसिक रूप से बीमार लोग हैं. मेरी नज़र में उनसे निपटना सिर्फ़ समय की बर्बादी है.” ट्रंप ने आगे कहा कि वह “स्टीव विटकॉफ़ और जेराल्ड कुशनर से बात करेंगे.” लेकिन उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि “वार्ता की मेज़ पर वापस लौटना तेहरान के ऊपर निर्भर है.”
परमाणु हथियार को लेकर ट्रंप का बयान
एक अन्य सवाल के जवाब में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “सब लोग इस बात से सहमत हैं कि उनके पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए. हम एक समझौते तक पहुंच गए मगर बाद में वे मीडिया के सामने यह दिखाने की कोशिश करते हैं कि ऐसी कोई बातचीत हुई ही नहीं थी.” ट्रंप का यह बयान ईरान और अमेरिका के बीच हुए जवाबी हमलों के बाद आया. दोनों देशों ने एक-दूसरे पर युद्धविराम (सीज़फायर) समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया.
ट्रंप के बयान पर ईरानी प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीज़फ़ायर को “ख़त्म हो चुका” बताने के बाद ईरान की प्रतिक्रिया आई है. ईरानी विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि अमेरिका ने उसके दक्षिणी तट के पास मौजूद कई निग़रानी और सर्विलांस केंद्रों पर हमला किया है. यह युद्ध समाप्ति से जुड़े समझौते का उल्लंघन है.
विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट में ईरान से जुड़ी व्यवस्थाओं का उल्लंघन हुआ है. इसके अलावा, लेबनान पर इज़राइल के हमले भी जारी हैं. ईरान का कहना है कि इन वजहों से युद्ध ख़त्म करने वाले समझौते के कई महत्वपूर्ण हिस्से प्रभावहीन हो गए हैं. ईरान ने इसके लिए अमेरिका को ज़िम्मेदार ठहराया है.
ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ईरानी सशस्त्र बल उन जगहों को निशाना बना सकते हैं, जहाँ से उनके ऊपर हमले किए गए हैं या जिनकी योजना बनाई गई है. साथ ही ईरान ने कहा है कि खाड़ी देश किसी भी अमेरिकी कार्रवाई के लिए अपनी जमीन या सुविधाओं का इस्तेमाल न होने दें. साथ ही चेतावनी दी है कि ऐसा करना अमेरिका का साथ देने और अपराध में भागीदार बनने जैसा होगा.


