रांची: झारखंड के बोकारो में हुए करोड़ों रुपये के हाई-प्रोफाइल ट्रेजरी घोटाले की जांच कर रही सीआईडी ( CID ) के हाथ एक बड़ा और चौंकाने वाला सुराग लगा है। सीआईडी के मुताबिक आरोपी कौशल कुमार पांडेय ने अपने स्वीकारोक्ति बयान में खुद को मुख्य आरोपी बताया है। जांच टीम के सामने उसने बताया, “मैं उपेंद्र सिंह से संबंधित जानकारी हासिल कर दस्तावेज में जालसाजी की और उसे एडिट किया। इसके बाद उपेंद्र सिंह के अकाउंट नंबर यानी की जगह अपनी पत्नी अन्नू पांडेय का अकाउंट नंबर डाल दिया था।”
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इस पूरे घोटाले के केंद्र में झारखंड पुलिस के एक सेवानिवृत्त सब-इनस्पेक्टर उपेंद्र सिंह का नाम सामने आया है। हालांकि, सीआईडी की जांच में अब तक उपेंद्र सिंह की कोई सीधी संलिप्तता नहीं मिली है। जांच के अनुसार वे इस घोटाले के मास्टरमाइंड के केवल एक मोहरे थे, जिनकी जानकारी के बिना उनके नाम पर करोड़ों का खेल हो गया।
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कागजों में बढ़ा दी रिटायरमेंट की उम्र
सीआईडी को मिले पुख्ता सबूतों के मुताबिक, सब-इंस्पेक्टर उपेंद्र सिंह जुलाई 2016 में ही अपनी सेवा पूरी कर रिटायर हो चुके थे। नियमानुसार रिटायरमेंट के तुरंत बाद उनका वेतन बंद हो जाना चाहिए था। लेकिन बोकारो एसपी ऑफिस में तैनात शातिर अकाउंटेंट कौशल कुमार पांडेय की नजर उनके दस्तावेजों पर थी।
मुख्य आरोपी कौशल ने सरकारी डिजिटल सिस्टम में सेंध लगाई और उपेंद्र सिंह के सरकारी दस्तावेजों और जन्मतिथि के साथ भारी छेड़छाड़ की। उसने डिजिटल रिकॉर्ड्स में उपेंद्र सिंह की रिटायरमेंट की उम्र को बढ़ाकर मार्च 2026 कर दिया। इसके कारण सरकारी सिस्टम में वे लगातार एक सक्रिय कर्मचारी दिखाई देते रहे।
GPF नंबर का गलत इस्तेमाल और पत्नी का बैंक अकाउंट लिंक
इस जालसाजी को पुख्ता करने के लिए अकाउंटेंट कौशल कुमार पांडेय ने उपेंद्र सिंह के जनरल प्रोविडेंट फंड ( GPF ) नंबर SWN/POL/291 का गलत इस्तेमाल किया।
डिजिटल हेरफेर का सबसे शातिर कदम बैंक खातों को बदलना था। उपेंद्र सिंह का वास्तविक सरकारी बैंक खाता संख्या 11475777291 था। आरोपी कौशल ने कंप्यूटर सिस्टम से इस असली खाते को डिलीट कर दिया। इसके बाद, उसने अपनी पत्नी अन्नू पांडेय का बैंक खाता संख्या 42945898462 सिस्टम में दर्ज कर दिया, ताकि सरकारी खजाने से निकलने वाला पैसा सीधे उसके घर पहुंच सके।
सरकारी खजाने को लगाया 4.29 करोड़ रुपये का चूना
उपेंद्र सिंह को मार्च 2026 तक कागजों पर कार्यरत दिखाकर आरोपी ने उनके वेतन के मद से कुल 4 करोड़ 29 लाख रुपए से अधिक की भारी-भरकम राशि बोकारो ट्रेजरी से निकाल ली। यह पूरी रकम किस्तों में उसकी पत्नी के बैंक खाते में ट्रांसफर होती रही और विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी।
मामले का खुलासा होने के बाद सीआईडी अब इस बात की कड़ाई से जांच कर रही है कि क्या इस बड़े वित्तीय फ्रॉड में विभाग के कुछ अन्य बड़े अधिकारी या बैंक कर्मचारी भी शामिल थे। इस डिजिटल सेंधमारी ने राज्य के ट्रेजरी सिस्टम की सुरक्षा को लेकर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।




