Fatty Liver: सेहत के नाम पर रोज फलों का जूस पीना आपकी लिवर के लिए नुकसानदेह हो सकता है। हाँ, जरूरत से ज्यादा जूस पीने से Non-Alcoholic Fatty Liver Disease यानी NAFLD का रिस्क काफी बढ़ जाता है।दरअसल जब फल निचोड़कर जूस बनता है तो फाइबर अलग हो जाता है। बचा सिर्फ गाढ़ा फ्रुक्टोज यानी फल की शुगर। ये शुगर बिना फाइबर के सीधे लिवर में जाती है और वहां फैट के रूप में जमा होने लगती है।
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जूस से लिवर खराब कैसे होता है?
फाइबर गायब: साबुत फल खाने पर फाइबर शुगर को धीरे-धीरे रिलीज करता है। जूस में फाइबर नहीं होता, इसलिए ब्लड शुगर एकदम स्पाइक करता है।
लिवर पर लोड: एक्स्ट्रा फ्रुक्टोज को पचाना लिवर के लिए मुश्किल हो जाता है। लिवर इसे प्रोसेस न कर पाने पर वसा में बदल देता है। यही फैट लिवर में जमकर फैटी लिवर की वजह बनता है।
पैकेज्ड जूस डबल खतरा: बाजार के डिब्बाबंद जूस में ऊपर से चीनी और प्रिजर्वेटिव मिले होते हैं। ये लिवर को और तेजी से डैमेज करते हैं।
मात्रा ज्यादा: एक गिलास जूस पीने का मतलब है एक बार में 3 से 4 फलों जितनी फ्रुक्टोज लेना। इतनी शुगर आप साबुत फल खाकर नहीं लेते।
लिवर बचाने के लिए क्या करें?
जूस की जगह फल खाएं: पूरे फल में फाइबर, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट सब मिलते हैं। लिवर के लिए ये बेस्ट है।जूस पीना ही है तो लिमिट में पीजिए, घर पर बना फ्रेश जूस, बिना चीनी मिलाए, थोड़ी मात्रा में ही लें।
डॉक्टर की सलाह
अगर आप लिवर हेल्दी रखना चाहते हैं तो अपनी डाइट पर नजर डालें। आप रोजाना जूस पीते हैं क्या? या आपको डायबिटीज या मोटापे जैसी कोई दिक्कत है? इनके हिसाब से डाइट में बदलाव करके लिवर को हेल्दी रखा जा सकता है।
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