हेल्थ डेस्क : Vitamin D Supplement के गलत इस्तेमाल से पहुंचता है किडनी को नुकसान, जानिए इसे लेने का सही तरीका बिना सोचे-समझे या अत्यधिक मात्रा में विटामिन डी (Vitamin D) सप्लीमेंट्स का सेवन करने से शरीर में कैल्शियम का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ जाता है, जिससे किडनी फेलियर (गुर्दे की विफलता), पथरी और दिल की बीमारियों का गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को विटामिन डी टॉक्सिसिटी (Vitamin D Toxicity) या हाइपरविटामिनोसिस डी कहा जाता है।
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किडनी को नुकसान कैसे पहुँचता है?
- हाइपरकैल्सीमिया (Hypercalcemia): विटामिन डी का मुख्य काम शरीर में कैल्शियम को सोखना है। अत्यधिक विटामिन डी से रक्त में कैल्शियम का स्तर असामान्य रूप से बढ़ जाता है।
- किडनी की पथरी (Kidney Stones): अतिरिक्त कैल्शियम किडनी में जमा होकर पथरी का रूप ले लेता है।
- नेफ्रोकैल्शिनोसिस (Nephrocalcinosis): कैल्शियम का स्तर ज्यादा होने से यह किडनी के नाजुक ऊतकों (Tissues) में जमा होने लगता है, जिससे किडनी सिकुड़ सकती है और हमेशा के लिए खराब हो सकती है।
- किडनी फेलियर (Kidney Failure): गंभीर मामलों में बिना किसी लक्षण के अचानक एक्यूट किडनी इंजरी या क्रोनिक किडनी डिसीज हो सकती है।
विटामिन डी टॉक्सिसिटी के शुरुआती लक्षण
यदि आप सप्लीमेंट ले रहे हैं और नीचे दिए लक्षण महसूस हों, तो तुरंत सतर्क हो जाएं:
- हर समय अत्यधिक थकान और कमजोरी लगना
- जी मिचलाना, उल्टी आना और भूख में कमी
- बार-बार पेशाब आना और अत्यधिक प्यास लगना
- पेट में तेज दर्द, कब्ज या दस्त की समस्या
- मानसिक भ्रम, चिड़चिड़ापन या चक्कर आना
विटामिन डी लेने का सही तरीका
विटामिन डी शरीर के लिए बहुत जरूरी है, लेकिन इसे सुरक्षित तरीके से लेने के लिए इन नियमों का पालन करें:
- पहले ब्लड टेस्ट कराएं: सप्लीमेंट शुरू करने से पहले हमेशा विटामिन डी3 (25-Hydroxy Vitamin D) टेस्ट करवाएं।
- रिपोर्ट के आधार पर खुराक:
- 30 से 50 ng/mL: यह सामान्य स्तर है, इसमें सप्लीमेंट की जरूरत नहीं होती।
- 20 ng/mL से कम: यह विटामिन डी की कमी दर्शाता है, जिसके लिए डॉक्टर इलाज तय करते हैं।
- 100 ng/mL से ज्यादा: यह स्तर बेहद खतरनाक और टॉक्सिक माना जाता है।
- डॉक्टर की सलाह अनिवार्य: बिना डॉक्टर की पर्ची के ओवर-द-काउंटर (OTC) हाई-डोज सप्लीमेंट्स (जैसे 60,000 IU के पाउच या कैप्सूल) खुद से कभी न खरीदें।
- भोजन के साथ लें: विटामिन डी एक फैट-सॉल्युबल (वसा में घुलनशील) विटामिन है। इसे भारी भोजन या दूध के साथ लेने से शरीर इसका बेहतर अवशोषण कर पाता है।
- प्राकृतिक स्रोतों को प्राथमिकता दें: रोजाना सुबह 15-20 मिनट धूप में बैठें। धूप से शरीर कभी भी विटामिन डी की ओवरडोज नहीं बनाता है। इसके अलावा अंडे की जर्दी, मशरूम और फैटी फिश को डाइट में शामिल करें।
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