Thursday, June 25, 2026

झारखंड प्रदेश कांग्रेस ने पूर्व मंत्री योगेन्द्र साव का 3 साल का निष्कासन, 3 महीने रद्द कर पार्टी में वापस किया शामिल

रांची: झारखंड के झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने हजारीबाग जिला स्थित बड़कागांव के पूर्व विधायक और कृषि मंत्री योगेंद्र साव का निष्कासन तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है। पूर्व मंत्री को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में करीब 3 महीने पहले, मार्च महीने में 3 साल के लिए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया था। गुरुवार को झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने पूर्व विधायक योगेंद्र साव के निष्कासन आदेश को रद करते हुए उनकी प्राथमिक सदस्यता को बहाल कर दिया। इस संबंध में प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से आधिकारिक पत्र भी जारी कर दिया गया है।

क्यों हुए थे निष्कासित? 

इस पूरे विवाद की जड़ें इस साल मार्च महीने में हुए एक बड़े प्रशासनिक एक्शन से जुड़ी हैं। दरअसल, एनटीपीसी (NTPC) के खनन क्षेत्र के विस्तार को लेकर हजारीबाग जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए योगेंद्र साव के पैतृक घर को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया था। इस कार्रवाई से पूर्व मंत्री बेहद नाराज और आक्रोशित थे।

घर टूटने के तुरंत बाद योगेंद्र साव ने फेसबुक लाइव पर आकर न सिर्फ कांग्रेस आलाकमान बल्कि सूबे में गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और पूरे तंत्र के खिलाफ बेहद तल्ख और आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं।

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पार्टी के अनुशासन समिति ने किया था निष्कासित

21 मार्च को प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन समिति के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव ने साव के इस आचरण को ‘पार्टी और गठबंधन विरोधी’ माना था। समिति का तर्क था कि चूंकि कांग्रेस इस सरकार में साझीदार है, इसलिए मुख्यमंत्री के खिलाफ सार्वजनिक मंच से ऐसी अनुशासनहीन टिप्पणी मर्यादा के खिलाफ है। इसी अनुशंसा के आधार पर उन्हें 3  साल के लिए सस्पेंड कर दिया गया था।

“संगठन को मजबूत करने के लिए समर्पित नेताओं की जरूरत”- कांग्रेस

मात्र तीन महीने के भीतर इस कड़े फैसले को बदलने के पीछे पार्टी की अपनी रणनीतिक मजबूरी और संगठन को मजबूत करने की कवायद देखी जा रही है। फैसले की जानकारी देते हुए प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी अपने समर्पित नेताओं और कार्यकर्ताओं को साथ लेकर संगठन को और अधिक सशक्त और धारदार बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, और यह निर्णय इसी दिशा में उठाया गया कदम है।

प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने उम्मीद जताई है कि योगेंद्र साव अब पुरानी बातों को पीछे छोड़कर पूर्व की तरह पार्टी की जन-हितैषी नीतियों और सिद्धांतों के अनुरूप संगठन को मजबूत करने में अपनी सक्रिय और अग्रिम भूमिका निभाएंगे।

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बड़कागांव का पावरहाउस है साव परिवार

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो कांग्रेस पार्टी योगेंद्र साव को ज्यादा दिनों तक खुद से दूर रखने का जोखिम नहीं उठा सकती थी। साव परिवार का हजारीबाग के बड़कागांव और विस्थापितों की राजनीति पर मजबूत होल्ड है। इस क्षेत्र से खुद योगेंद्र साव, उनकी पत्नी निर्मला देवी और उनकी बेटी अंबा प्रसाद अलग-अलग समय पर विधायक रह चुके हैं। विस्थापितों और रैयतों के हक की लड़ाई लड़ने के कारण जमीनी स्तर पर इस परिवार का एक बड़ा वोट बैंक है, जिसे ध्यान में रखकर ही यह ‘डैमेज कंट्रोल’ किया गया है।

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