अयोध्या/लखनऊ: राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) रविवार की शाम सीएम योगी को शुरुआती रिपोर्ट देने के लिए उनके आवास पहुंच गई है। एसआईटी ने मौके से जुटाए गए सारे सबूत और लोगों से की पूछताछ का ब्योरा 7 पेन ड्राइव में सुरक्षित किया है। 6 दिन की जांच में 150 संदिग्धों के नाम सामने आए हैं। इनमें से 25 लोगों पर कार्रवाई के आसार हैं। जिन लोगों से SIT पूछताछ कर चुकी है, उन्हें अगले आदेश तक कहीं बाहर न जाने की चेतावनी दी गई है। इनमें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा भी शामिल हैं। SIT ने राम मंदिर में दबदबा रखने वाले रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू से लगभग हर दिन पूछताछ की। टीम ने उसके करीबियों, रिश्तेदारों और उनकी संपत्तियों की भी जानकारी हासिल की है।
Highlights:
इस 6 दिन में टीम ने कई जरूरी दस्तावेज जैसे- सीसीटीवी फुटेज, चढ़ावे के संबंध में गहरी जानकारी, चढ़ावा की गिनती करने का तरीका, बैंक में पैसा ले जाने का तरीका सहित एक-एक बिंदुओं पर बहुत बारीकी से पड़ताल की। छठे दिन शनिवार को टीम ने सभी आरोपियों और संदिग्धों के बेंक खातों की जानकारी हासिल की है। इन सब जांच के बाद टीम सारे सबूत अपने साथ लेकर गई है।
टीम ने खंगाले 2021 तक के पुराने रिकॉर्ड
SIT ने मंदिर के दानपात्रों की धनराशि के उपयोग, अनावश्यक खर्चों और भूमि खरीद से जुड़े मामलों की भी जांच की। 2021 तक के पुराने रिकॉर्ड भी खंगाले। बैंक अधिकारियों से भी पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा पर कार्रवाई लगभग तय है। दोनों को पद से हटाया जा सकता है। इसके अलावा, मंदिर के निर्माण प्रभारी गोपाल राव को भी पद से हटाया जा सकता है।
अब तक 2 करोड़ की बरामदगी
चढ़ावा चोरी मामले में 5 लोगों लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर उर्फ टिन्नू की निशानदेही पर अब तक 2 करोड़ रुपए की रिकवरी की गई है। ये सभी मंदिर में दान राशि की गिनती की ड्यूटी से जुड़े थे। मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारी टिन्नू के घर से 13 जून को सोना मिला था। हालांकि, सोना कितना है, यह अभी कन्फर्म नहीं है।
दान पेटियों से लेकर कीमती आभूषणों के रिकॉर्ड में झोल
प्रारंभिक जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। एसआईटी के सूत्रों के मुताबिक, भगवान राम को चढ़ाए गए सोने, चांदी के आभूषणों, हीरे और अन्य कीमती पत्थरों के आधिकारिक रिकॉर्ड में भारी विसंगतियां मिली हैं।
जब एसआईटी ने ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों से इन बेशकीमती आभूषणों और कीमती पत्थरों से जुड़े दस्तावेजों और स्टॉक रजिस्टर पर सवाल किए, तो वे कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस मामले में जल्द ही नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज की जा सकती है।
जांच में अब तक क्या-क्या हुआ?
अयोध्या राम मंदिर दान और वित्तीय प्रबंधन मामले की जांच कर रही तीन सदस्यीय हाई-लेवल एसआईटी (SIT) की कार्रवाई अब बेहद आक्रामक दौर में पहुंच गई है। छह दिनों तक अयोध्या में डेरा डालने के बाद एसआईटी ने जो सबूत जुटाए हैं और जिन रसूखदारों से पूछताछ की है, उससे राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के भीतर हड़कंप मचा हुआ है।
एसआईटी की इस कार्रवाई में रडार पर आए प्रमुख संदिग्धों और अब तक मिले पुख्ता सबूतों का विस्तृत ब्योरा नीचे दिया गया है:
1. जांच के दायरे में आए प्रमुख संदिग्ध
एसआईटी ने ६ दिनों में लगभग 150 लोगों से कड़ाई से पूछताछ की है, जिसमें ट्रस्ट के शीर्ष अधिकारियों से लेकर बैंक कर्मचारी तक शामिल हैं। सबसे बड़े संदिग्धों में ये नाम सामने आए हैं:
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टिन्नू यादव (चंपत राय के करीबी सहयोगी): इस पूरे मामले में सबसे बड़ा नाम टिन्नू यादव का सामने आया है, जो राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के बेहद खास और करीबी माने जाते हैं। टिन्नू यादव सीधे तौर पर मंदिर के दान पात्रों से निकलने वाले चढ़ावे और नकदी की गिनती के प्रबंधन को देखते थे। आरोप है कि उन्होंने ट्रस्ट के फंड और चढ़ावे से करोड़ों रुपये का गबन किया और उस पैसे से एक बेहद आलीशान मकान भी बनवाया है। एसआईटी द्वारा पुख्ता सबूत मिलने के बाद टिन्नू यादव की किसी भी वक्त गिरफ्तारी हो सकती है।
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लवकुश मिश्रा: एसआईटी ने दान में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में लवकुश मिश्रा को हिरासत में लेकर लंबी पूछताछ की है। सूत्रों के मुताबिक, लवकुश के पास से कुछ ऐसे अहम सुराग मिले हैं जो इस रैकेट की कड़ियों को आपस में जोड़ते हैं।
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अनिल मिश्रा और गोपाल राव (ट्रस्ट पदाधिकारी व निर्माण सहायक): ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी अनिल मिश्रा और निर्माण कार्यों से जुड़े सहायक गोपाल राव भी सीधे तौर पर एसआईटी की जांच और पूछताछ के दायरे में आ चुके हैं।
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चंपत राय (महासचिव, राम मंदिर ट्रस्ट): एसआईटी ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से भी गहन पूछताछ की है और उनके कार्यकाल के दौरान के वित्तीय रिकॉर्ड खंगाले हैं। सूत्रों की मानें तो उनकी भूमिका की भी गंभीरता से समीक्षा की जा रही है।
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SBI और TCS के कर्मचारी: एसआईटी ने पिछले छह दिनों में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और टीसीएस (TCS) के करीब 12 कर्मचारियों सहित लगभग 150 लोगों से कड़ाई से पूछताछ की है। संदेह है कि दान के पैसे की गिनती के दौरान कुछ कर्मियों ने सीधे कैश गायब किया है।
2. एसआईटी को अब तक क्या सबूत मिले?
एसआईटी को महज 6 दिनों के भीतर कई ऐसे तकनीकी और दस्तावेजी सबूत मिले हैं, जो यह इशारा करते हैं कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश थी:
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डिलीटेड सीसीटीवी (CCTV) फुटेज का सस्पेंस: जांच टीम को सबसे बड़ा तकनीकी सबूत यह मिला है कि मंदिर परिसर और विशेष रूप से दान-कलेक्शन रूम की कुछ बेहद महत्वपूर्ण तारीखों की सीसीटीवी फुटेज गायब या डिलीट की गई हैं। तकनीकी एक्सपर्ट्स की मदद से इसे रिकवर करने का प्रयास किया जा रहा है।
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स्टॉक रजिस्टर और आभूषणों के रिकॉर्ड में विसंगति: भगवान राम को देश-विदेश के भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने, चांदी, हीरे और अन्य कीमती पत्थरों का जो स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक जमा आभूषण हैं, उनके आंकड़ों में भारी अंतर (मिसमैच) पाया गया है। ट्रस्ट के पदाधिकारी इस पर कोई भी डॉक्यूमेंट्री प्रूफ या संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।
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जमीन खरीद के दस्तावेजों में गड़बड़ी: वर्ष 2021 से लेकर अब तक ट्रस्ट द्वारा मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में खरीदी गई लगभग 71 एकड़ जमीन के सौदों की फाइलों में भारी गड़बड़ी मिली है। इसमें बाजार भाव से 500 से 800 प्रतिशत अधिक दाम पर जमीनें खरीदी गईं, जिसमें बिचौलियों और ट्रस्ट के कुछ लोगों के बीच सीधे वित्तीय लेनदेन के डिजिटल सबूत (बैंक ट्रांजैक्शन) मिले हैं।
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गवाहों के बयान: दान की गिनती करने वाले कुछ कर्मचारियों और मंदिर परिसर के सुरक्षाकर्मियों ने एसआईटी के सामने सरकारी गवाह बनते हुए टिन्नू यादव और अन्य सहयोगियों के खिलाफ सीधे तौर पर नकदी गायब करने से जुड़े बयान दर्ज कराए हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपील:
इस हाई-प्रोफाइल मामले पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद बयान जारी कर राम भक्तों से अपील की है कि “वे मर्यादा बनाए रखें और किसी के बहकावे में न आएं। एसआईटी जांच दूध का दूध और पानी का पानी कर देगी। जांच रिपोर्ट आने तक किसी भी तरह की राजनीतिक बयानबाजी से बचा जाए ताकि जांच प्रभावित न हो।”
राजनीतिक दलों के निशाने पर था ट्रस्ट, सरकार ने उठाए कदम
बता दें कि समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव और आम आदमी पार्टी (आप) सहित कई प्रमुख विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया था और न्यायपालिका से इस पर स्वतः संज्ञान लेने की मांग की थी। विवाद बढ़ता देख खुद राम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने बीती 13 जून को इस हाई-लेवल एसआईटी का गठन किया था।
कौन-कौन हैं एसआईटी टीम में?
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विजय विश्वास पंत (कमिश्नर, लखनऊ मंडल – टीम प्रमुख)
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किरण एस. (पुलिस महानिरीक्षक – IG, लखनऊ रेंज)
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नील रतन (विशेष सचिव, वित्त विभाग)
प्रशासन ने पीड़ितों, गवाहों या इस मामले से जुड़ी किसी भी पुख्ता जानकारी को साझा करने के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर 8597965016 भी जारी किया हुआ है।
अब आगे क्या?
एसआईटी अपनी 70 से अधिक पन्नों की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपने के लिए तैयार है। सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट के आधार पर टिन्नू यादव और कुछ बैंक कर्मियों पर नामजद एफआईआर दर्ज होने के साथ ही, राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा फेरबदल हो सकता है। काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर यहाँ भी किसी वरिष्ठ रिटायर्ड आईएएस अधिकारी को बतौर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने की सिफारिश की जा सकती है।
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