न्यूज डेस्क : कर्नाटक में नवगठित डीके शिवकुमार सरकार में मंत्री पद संभालने वाले रामलिंगा रेड्डी ने 24 घंटे बाद ही मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. बताया जा रहा है कि बेंगलुरु डेवलपमेंट विभाग नहीं मिलने पर कांग्रेस नेता रामलिंगा रेड्डी ने डीके शिवकुमार की सरकार में मंत्री पद से इस्तीफ़ा दिया है. रेड्डी को गुरुवार देर रात लोक भवन से जारी लिस्ट में बड़े और मध्यम सिंचाई विभाग का पोर्टफोलियो दिया गया था. शिवकुमार मंत्रिमंडल में बेंगलुरु डेवलपमेंट पोर्टफोलियो कृष्णा बायरे गौडा को दिया गया था.
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डीके शिवकुमार ने किया था वादा
अपने इस्तीफे के संबंध में रेड्डी ने पत्रकारों से कहा, “मंत्रिमंडल में काम करना मेरे ज़मीर के ख़िलाफ़ है. साल 1992 में वीरप्पा मोइली की सरकार में मंत्री बनने के बाद से मैंने कभी कोई पोर्टफोलियो नहीं मांगा.” रेड्डी ने कहा कि सिद्धारमैया ने उन्हें साल 2023 में बेंगलुरु डेवलपमेंट पोर्टफोलियो देने की पेशकश की थी. उन्होंने कहा, “लेकिन शिवकुमार मेरे घर आए और मुझसे कहा कि ढाई साल बाद मुख्यमंत्री बनने के बाद वे मुझे यह पोर्टफोलियो सौंप देंगे.” उस वक़्त रेड्डी को ट्रांसपोर्ट और मुज़राई पोर्टफोलियो दिए गए थे.
नाराजगी नहीं : रामलिंगा रेड्डी
उन्होंने कहा, “मुझे सिद्धारमैया या शिवकुमार से कोई नाराज़गी नहीं है और मैं (कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन) खड़गे से भी नाराज़ नहीं हूं. कोई कितना अपमान सह सकता है?” उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रमुख अतिरिक्त मुख्य सचिव को अपने एक पर्सनल असिस्टेंट के ज़रिए अपना इस्तीफ़ा पत्र भेज रहे हैं.
सीएम डीके शिवकुमार का बयान
रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफ़े पर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा, “चिंता करने की कोई बात नहीं है. वे मेरे बहुत अच्छे मित्र हैं. हम मंत्रिमंडल में सबसे घनिष्ठ मित्रों में से हैं. हम इस समस्या को सुलझा लेंगे.” साल 1973 में कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए रेड्डी ने 1992 से गृह विभाग सहित कई पोर्टफोलियो संभाले हैं. रेड्डी ने कहा, “मैं विधायक बना रहूंगा और कांग्रेस पार्टी में ही रहूंगा.”


