Sunday, May 31, 2026

NEET-UG पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने NTA से पूछा- UPSC से क्यों नहीं सीखते?

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को NEET-UG पेपर लीक मामले की सुनवाई के दौरान नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने NTA से सवाल किया कि UPSC उससे बड़े स्तर पर परीक्षाएं कराता है, फिर वहां कभी पेपर लीक की घटना सामने क्यों नहीं आती। अदालत ने कहा कि NTA को UPSC से सीखने की जरूरत है।

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प्रधानमंत्री खुद कर रहे हैं निगरानी

सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद NEET पेपर लीक मामले की जांच पर नजर रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जांच में कोई चूक न हो।

मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस नरसिम्हा ने शिक्षा मंत्रालय से NEET-UG परीक्षा की जांच प्रक्रिया का पूरा ब्योरा मांगा। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि पेपर लीक के बाद बड़े स्तर पर सुधार किए गए हैं और री-टेस्ट के लिए नई सुरक्षा व्यवस्था अपनाई गई है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर पूरी तरह गंभीर है।

हाई-पावर कमेटी से भी कोर्ट ने पूछे सवाल

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में बनाई गई हाई-पावर मॉनिटरिंग कमेटी के प्रमुख और पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन से भी सवाल किया। अदालत ने पूछा कि समिति की सिफारिशों और सुधारों के बावजूद इस बार फिर ऐसी स्थिति क्यों बनी।

सुप्रीम कोर्ट के पूछे जाने पर डॉ. राधाकृष्णन ने बताया कि समिति की अधिकांश सिफारिशें लागू की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि NEET-PG 2025 सफलतापूर्वक आयोजित हुई थी और इस बार सामने आई कमजोरियों को री-टेस्ट से पहले दूर किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं युवाओं को मानसिक रूप से झकझोर देती हैं। लाखों छात्र कठिन मेहनत और उम्मीदों के साथ परीक्षा देते हैं, ऐसे में उन्हें इस तरह के तनाव और निराशा से बचाना बेहद जरूरी है।

NTA को मजबूत बनाने की जरूरत

अदालत ने यह भी कहा कि NTA अभी एक स्थायी और मजबूत संस्था की तरह काम नहीं कर रही है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि एजेंसी को अधिक सक्षम और सुरक्षित बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि NTA को IIT और अन्य बड़े संस्थानों के विशेषज्ञों की मदद लेनी चाहिए, ताकि भविष्य में परीक्षाएं पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से आयोजित की जा सकें।

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