न्यूज डेस्क: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के पाठ्यक्रम में अब मैथिली भाषा को भी जगह मिलेगी. जिसे लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी साझा की और इसे मिथिलांचल के लिए ऐतिहासिक फैसला बताया है. इसके साथ ही सीएम सम्राट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र किया और कहा कि भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा मिलेगा साथ ही देशभर में नई पहचान और सम्मान मिलेगा.
Highlights:
कक्षा 1 से विषयों में मातृभाषा शामिल
सीएम सम्राट ने कहा कि CBSE के सिलेबस में कक्षा 1 से माध्यमिक स्तर तक मैथिली को मातृभाषा को विषय के रूप में शामिल किया गया है. यह फैसला मिथिला क्षेत्र के लोगों के लिए गर्व की बात है. वहीं उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा है कि इससे नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति और परंपरा से मजबूती से जुड़ सकेंगे. जिसके साथ ही बच्चों को अपनी मातृभाषा में पढ़ाई करने का मौका मिलेगा.
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भारतीय भाषा और सांस्कृतिक को बढ़ावा मिलेगा
इसके साथ ही सीएम ने पीएम मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है. मैथिली को CBSE पाठ्यक्रम में शामिल करना भारतीय भाषाओं को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना गया है. उन्होंने कहा कि सरकार भारतीय परंपरा, भाषा और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है. मैथिली भाषा लंबे समय से मिथिलांचल की पहचान रही है.
युवा पीढ़ी के लिए मजबूत कदम
मिथिला की लोक संस्कृति, साहित्य, गीत-संगीत और कला में मैथिली का खास स्थान है. वहीं अब CBSE जैसे राष्ट्रीय शिक्षा बोर्ड में जगह मिलने से मैथिली भाषा को देशभर में नई पहचान और सम्मान मिलने की उम्मीद है. शिक्षा और संस्कृति से जुड़े लोगों का कहना है कि इससे मैथिली भाषा को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिलेगी और युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहेगी. बच्चों को अगर शुरुआत से ही उनकी मातृभाषा की पढ़ाई होगी तो उनकी समझने और सीखने की क्षमता काफी बेहतर होगी. वहीं मैथिली भाषा को पाठ्यक्रम में शामिल करने से मिथिला क्षेत्र के लाखों छात्रों को इसका सीधा फायदा मिलेगा.


