न्यूज डेस्क: राज्य सरकार ने आज JTET नियमावली में क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं को लेकर उत्पन्न विवाद के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण बैठक की. इस बैठक की अध्यक्षता मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने की, जिसमें उन्होंने जेटेट नियमावली से भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषाओं को बाहर किए जाने के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की.
Highlights:
समिति के सदस्यों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से पूछा कि आखिर किन आधारों पर इन भाषाओं को नियमावली से हटाया गया है. वहीं समिति ने विभाग से संबंधित सभी तथ्यात्मक और प्रशासनिक डाटा उपलब्ध कराने को कहा है, ताकि निर्णय के पीछे की प्रक्रिया और उनका आधार स्पष्ट हो सके.
समिति ने भाषाओं का विस्तृत विवरण मांगा
समिति ने राज्य के विभिन्न जिलों में भोजपुरी, मगही और अंगिका बोलने वाले लोगों की संख्या की जानकारी मांगी है. इसके साथ ही पूर्व में आयोजित जेटेट परीक्षाओं में इन भाषाओं के माध्यम से कितने अभ्यर्थी शामिल हुए थे, इसका भी विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने को कहा है. समिति का मानना है कि किसी भी भाषा को नियमावली में शामिल या बाहर करने से पहले उससे जुड़े सामाजिक, शैक्षणिक और जनसंख्या संबंधी आंकड़ों का अध्ययन करना आवश्यक है.
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समिति की अगली बैठक 22 मई को आयोजित
इस बैठक में आदिम जनजातीय भाषाओं का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया. विशेष रूप से असुर और बिरहोर जैसी आदिम जनजातियों की भाषाओं को नियमावली से हटाने के आधार पर भी सवाल उठाए गए. समिति के सदस्यों ने कहा कि इन भाषाओं का संबंध राज्य की सांस्कृतिक और जनजातीय पहचान से जुड़ा हुआ है, इसलिए इनके संबंध में संवेदनशीलता और व्यापक अध्ययन की आवश्यकता है.
बैठक में कई सदस्य शामिल
इसके साथ ही समिति ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि राज्य के किस जिले और क्षेत्र में कौन-कौन सी जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाएं बोली जाती हैं, उनका विस्तृत आंकड़ा तैयार करें. अगली बैठक में इससे संबंधित भाषाओं के उपयोग, बोलने वालों की संख्या और शैक्षणिक आवश्यकता का भी संपूर्ण विवरण प्रस्तुत करने को कहा गया है.
वहीं बैठक के अंत में तय किया गया कि समिति की अगली बैठक शुक्रवार 22 मई को आयोजित की जाएगी, जिसमें शिक्षा विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों और रिपोर्ट के आधार पर आगे की चर्चा होगी. मानना है कि इस प्रक्रिया के बाद भाषा विवाद के समाधान की दिशा में कोई ठोस निर्णय लिया जा सकता है. वहीं इस बैठक में मंत्री राधाकृष्णा किशोर, दीपिका पांडे सिंह, योगेंद्र प्रसाद, सुदिव्य कुमार सोनू तथा संजय प्रसाद यादव समेत समिति के अन्य सदस्य भी उपस्थित थे.


