न्यूज डेस्क: विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ 10 मई को राहुल गांधी की मौजूदगी में लहृी थी। उन्हें विश्वनाथ आर्लेकर ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय लगातार कई बड़े फैसले ले रहे हैं। उन्होंने राज्य में 200 यूनिट मुफ्त बिजली, महिलाओं के लिए बसों में मुफ्त यात्रा जैसी योजनाओं की घोषणा की है।
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इसके अलावा उन्होंने पिछली सरकार के वित्तीय मामलों की जांच के लिए व्हाइट पेपर जारी करने का भी फैसला लिया है।उन्होंने राज्य में धार्मिक स्थलों, शैक्षणिक संस्थानों और बस अड्डों के 500 मीटर के दायरे में स्थित 717 TASMAC शराब दुकानों को बंद करने का आदेश दिया है। सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि इन दुकानों को अगले दो सप्ताह के भीतर बंद किया जाए।
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लंबे समय से उठ रही थी मांग
तमिलनाडु में शराब दुकानों को लेकर लंबे समय से विवाद और विरोध होता रहा है। राज्य के कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों की मांग थी कि स्कूल, कॉलेज और मंदिरों के पास स्थित शराब दुकानों को हटाया जाए। हालांकि शराब बिक्री से सरकार को बड़े स्तर पर राजस्व मिलता है, इसलिए अब तक इस दिशा में सीमित कदम ही उठाए गए थे। तमिलनाडु में 5000 से अधिक सरकारी शराब दुकानें संचालित होती हैं। इन दुकानों से राज्य सरकार को हर साल करीब 40 हजार करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। इसी वजह से पूर्ण शराबबंदी का मुद्दा हमेशा राजनीतिक बहस का विषय बना रहा है।
पहले भी बंद की गई थीं कई दुकानें
साल 2023 में एमके स्टालिन की सरकार ने जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद करीब 500 सरकारी शराब दुकानों को बंद करने का फैसला लिया था। इनमें स्कूलों और धार्मिक स्थलों के पास स्थित दुकानें शामिल थीं। इसके अलावा जिन इलाकों में स्थानीय लोग विरोध कर रहे थे, वहां से भी शराब दुकानें हटाई गई थीं। उस समय केवल चेन्नई में 61 दुकानों को बंद किया गया था। वहीं कांचीपुरम में 31 और मदुरै में 21 शराब दुकानें हटाई गई थीं।
जयललिता सरकार ने भी शुरू किया था अभियान
तमिलनाडु में शराब दुकानों को कम करने की शुरुआत साल 2016 में जे जयललिता ने की थी। उनकी सरकार ने चरणबद्ध तरीके से शराब दुकानों को बंद करना शुरू किया था। हालांकि बाद की सरकारों ने यह तर्क दिया कि पूरी तरह शराबबंदी लागू करने से अवैध शराब का कारोबार बढ़ सकता है, जिससे लोगों की जान को खतरा हो सकता है।
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तमिलनाडु में नकली शराब की घटनाएं भी चिंता का विषय रही हैं। स्टालिन सरकार के दौरान जहरीली शराब पीने से करीब 60 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद राज्य में शराब नीति को लेकर बहस और तेज हो गई थी।



