Saturday, June 13, 2026

भारत ने अमेरिका का किया कड़ा विरोध, कॉमर्शियल जहाजों पर हमला करना सही नहीं

एयरनाउ डेस्क : अमेरिका ईरान के बीच संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसे लेकर खाड़ी देशों में चिंता बढ़ती जा रही है। क्योंकि वॉर के कारण लगातार स्ट्रेट ऑफ होरमुज में भी ये टकराव जारी है। और अमेरिका और ईरान के कारण लगातार बाकी देशों को भी नुकसान हो रहा है, जिसमे भारत के जहाज और लोग भी शामिल है। 10 जून को हुए हमले के बाद से ही भारत और अमेरिका के रिश्तों पर सवाल उठ रहे हैं। जिसमे  भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर का बयान सामने आया है। जानकारी के मुताबकी एस जयशंकर ने अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियों से फोन पर खाड़ी क्षेत्र में किए अमेरिका नौसेना की कारवाई को लेकर बात की और कडा विरोध जताया। इस कारवाई में अमेरिका ने भारत के जहाज पर सीधा निशाना साधा था जिसमे 24 लोग सवार थे, जिसमे तीन लोगों की इसकी वजह से जान चली गई। इसी संदर्भ में जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, उन्होंने रुबियो से बात की है , और कॉमर्शियल जहाजों को निशाना बनाने वाली ऐसी कोई भी कारवाई उचित नहीं है।

सोशल मीडिया पर इसको लेकर एक और खबर फैल रही थी की समुद्र में एक और भारतीय जहाज को निशाना बनाया गया, और उसमे भी कुछ भारतीयों की मौत हो गई। हालांकि, इन सभी बातों को खारिज कर दिया गया है।

इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को लेकर बात हो सकती है, ऐसी खबरें सामने या रही थी, लेकिन इसी बीच एक रिपोर्ट सामने आई है। जिसमे ये दावे किए जा रहे हैं, की ईरान ने अपने हाइली एनरिच्ड यूरेनियम के स्टॉक सुरक्षित कर लिया है, और वहाँ पहुँचने वाले हर सुरंग को बंद कर दिया । यहाँ तक की और जो रास्ते हैं, उसके आगे विस्फोटक mines भी बिछा दी हैं। जानकारी सामने आई है की इसके वजह से अमेरिका अगर चाहेगा तो भी यूरेनियम तक नहीं पहुँच पाएगा।

दिलचस्प बात ये है की दोनों देशों के बीच समझौते को लेकर बैठक चलती हैं, ऐसे में डोनाल्ड ट्रम्प ने भी साफ कर दिया है की उन्हे ईरान का यूरेनियम चाहिए, और उसके लिए जरूरत पड़ी तो वो ईरान पर हमला भी कर सकते हैं। और ये सब तब हो रहा है, जब दोनों ही देश पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। दोनों ही देशों के बीच जो ये समझौता है, उसका सबसे अहम मुद्दा ही यूरेनियम है, और आने वाले समय में अगर बात आगे बढ़ती है तो फिर ईरान को यूरेनियम कितना है उनके पास कहाँ है ये दिखाना पड़ सकता है, और शायद इसलिए ईरान अभी से ही उसे छुपा रहा है।

एयर नाउ स्पेशल

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