Wednesday, July 22, 2026

तुर्की की मशहूर ड्रोन कंपनी Baykar ने बनाया सबसे खतरनाक ड्रोन, VIP लोगों के लिए बना बड़ा खतरा

न्यूज डेस्क: तुर्की की मशहूर ड्रोन कंपनी ने Baykar ने हाल ही में अपना नया AI पावर्ड कमिकाजे ड्रोन MIZRAK पेश किया है. जो तीर या भाला की तरह नजर आता है. यह लंबी दूरी का लॉइटरिंग मुनिशन है, जो हवा में घूम-घूमकर अपने लक्ष्य की तलाश करता है और फिर हमला कर देता है. इस ड्रोन की रेंज 1000 किलोमीटर से भी ज्यादा है, जो हवा में लगभग 7 घंटे तक रह सकता है और 40 किलों तक का वॉरहेड ले जा सकता है. यह ड्रोन SAHA 2026 प्रदर्शनी में पहली बार जनता के सामने आएगा, जो 5-9 मई 2026 तक इस्तांबुल में होगी.

MIZRAK एक स्मार्ट और ऑटोनॉमस ड्रोन है, जिसका उड़ान भरते समय वजन लगभग 200 किलों तक रहता है. वहीं इसके पंखों का फैलाव 4 मीटर है और ये 185 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है. यह ड्रोन 10,000 फीट की ऊंचाई तक जा सकता है, वहीं इसे सामान्य रनवे या रॉकेट असिस्ट के द्वारा लॉन्च किया जा सकता है.

खुद ही टारगेट और हमला करता 

जानकारी के अनुसार, यह 2 तरह के वैरिएंट में आता है. जिसमें एक 40 किलो का डबल वॉरहेड होता है जिससे भारी नुकसान पहुंचाया जा सकता है. वहीं दूसरा 20 किलो वॉरहेड के साथ रेडियो फ्रीक्वेंसी सीकर होता है जो रडार वाले टारगेट को आसानी से ढुंढ लेता है. इस ड्रोन में Baykar की EO/IR कैमरे लगे होते है जिससे ड्रोन को निगरानी और लक्ष्य पहचानने में मदद मिलती है. यह उड़कर ही नहीं बल्कि हवा में घूमकर सही मौका देखते ही हमला कर देता है. इसे Baykar के अन्य ड्रोन्स जैसे TB2, TB3 और AKINCI के साथ भी जोड़ा जा सकता है, जिससे स्वार्म अटैक संभव होगा.

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बिना GPS के भी चलता है ड्रोन

इस ड्रोन की एक खास बात है कि यह GPS पर निर्भर नहीं रहता है. बाकी के आम ड्रोन्स GPS पर निर्भर रहते है, जिसे दुश्मन जाम कर देते है और ये बेकार हो जाते है. वहीं MIZRAK एक AI-पावर्ड ऑटोपायलट सिस्टम है जो बिना GPS के भी काम करता है. क्योंकि इसमें ऑप्टिकल गाइडेंस और विजुअल पोजिशनिंग टेक्नोलॉजी लगी होती है.

इनर्शियल नेविगोशन सिस्टम ड्रोन के अंदर सेंसर्स इसकी गति, दिशा और स्थिति को ट्रैक करते रहता है. AI और कंप्यूटर विजन कैमरे से आने वाली तस्वीरों को प्रोसेस करता है और रीयल टाइम में आस-पास के नक्शे, इमारतों, पहाड़ों या लैंडमार्क्स से मैच करके अपनी पोजिशन पता करता है. SLAM जैसी तकनीक मदद करती है, जिसमें ड्रोन अपना नक्शा खुद बनाता और उसे लोकेट करता है. लक्ष्य के पास पहुंचने पर AI ऑप्टिकल और इंफ्रारेड इमेज से टारगेट को पहचानता है और हमला कर देता है. जहां भले ही कोई इंसान उसे कंट्रोल न कर रहा हो. इसी कारण से वह जैमिंग वाले इलाकों में भी पूरी तरह से काम करता है.

MIZRAK से VIP भी खतरें में 

MIZRAK से VIP या हाई वैल्यू टारगेट्स एंटी-जैमिंग एरिया में रहते वालों के लिए बहुत बड़ा खतरा है. आमतौर पर सुरक्षा एजेंसियां GPS  जैमिंग करके दुश्मन ड्रोन्स को भटका देती है, लेकिन MIZRAK बिना GPS की चलती है इसलिए इसे भटकाना मुश्किल है.  क्योंकि यह 1000 किलोमीटर दूर से आकर घंटों तक इलाके में घूमता रहता है और सही समय देखते ही हमला कर देता है.

खास बात यह है कि अगर कोई नेता या महत्वपूर्ण जगह पर मजबूत जैमिंग सिस्टम लगा हो, तब भी यह विजुअल और AI सिस्टम से काम चला लेता है. इसका 40 किलो वॉरहेड काफी शक्तिशाली है जो भारी नुकसान पहुंचा सकता है. स्वार्म मोड में कई ड्रोन्स एक साथ मिलकर हमला करें तो बचना और भी मुश्किल होगा. यह ड्रोन युद्ध के नियम बदल देता है खासकर उन देशों या सूमहों के जो लंबी दूरी के सटीक हमलों की तलाश में है.

युद्ध में नई तकनीक का प्रतीक

MIZRAK सिर्फ एक ड्रोन नहीं, बल्कि युद्ध की नई तकनीक का प्रतीक है. इसके साथ ही ये एक नई पीढ़ी है जो AI और ऑटोनॉमस टेक्नोलॉजी पर जोर देती है. SAHA 2026 में यह डेब्यू दुनिया भर के डिफेंस एक्सपर्ट्स को आकर्षित करेगा. Baykar ने पहले भी TB2 जैसे सिद्ध ड्रोन बना चुका है, जो कई देशों में इस्तेमाल भी हो चुका है. यह ड्रोन सैन्य संतुलन भी बदल सकता है और हाई-प्रोफाइल टारगेट्स सुरक्षा को नई चुनौतियां भी देगा.

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