न्यूज डेस्क : मध्य प्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में एक अहम क़दम उठाते हुए सोमवार को छह सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है. यह समिति राज्य में यूसीसी लागू करने की संभावनाओं, क़ानूनी पहलुओं और सामाजिक प्रभावों का अध्ययन करेगी. इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं.
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समिति में ये सदस्य हैं शामिल
समिति में अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई के अलावा रिटायर्ड आईएएस शत्रुघ्न सिंह, क़ानून के जानकार अनूप नायर, शिक्षाविद गोपाल शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता बुधपाल सिंह और अपर सचिव सामान्य प्रशासन विभाग अजय कटेसरिया को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है.
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कई कानूनों की होगी समीक्षा
सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार, समिति विभिन्न धर्मों और समुदायों से जुड़े वैवाहिक, उत्तराधिकार और पारिवारिक क़ानूनों की समीक्षा करेगी और यह आकलन करेगी कि एक समान क़ानून किस तरह लागू किया जा सकता है. साथ ही, यह समिति अन्य राज्यों के अनुभवों और न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णयों का भी अध्ययन करेगी. समिति उत्तराखंड और गुजरात के मॉडल का भी अध्ययन करेगी.
60 दिनों के अंदर रिपोर्ट
समिति में विधि विशेषज्ञों, प्रशासनिक अधिकारियों और समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है. यह समिति 60 दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी. गौरतलब है कि यूसीसी का मुद्दा लंबे समय से राष्ट्रीय बहस का विषय रहा है. ऐसे में मध्य प्रदेश सरकार का यह क़दम राज्य स्तर पर इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है. विपक्ष ने जहां इस फ़ैसले पर सवाल उठाए हैं, वहीं सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समानता और न्याय सुनिश्चित करना है.


