Wednesday, July 22, 2026

आदिवासी कमजोर नहीं हैं, सत्ता बनाना और सत्ता को बदलना भी जानते हैं : हेमन्त सोरेन

डिब्रूगढ़ : असम चुनाव प्रचार के दूसरे दिन मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन सह झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष ने डिब्रूगढ़ जिले के तिंगखोंग एवं सोनारी विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी महावीर बासके और बलदेव तेली के पक्ष में विशाल जनसभा को सम्बोधित किया।

अपने संबोधन में हेमन्त सोरेन ने कहा कि असम का चाय बागान समुदाय जो लगभग 200 वर्षों से असम की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहा है, आज भी अपने बुनियादी अधिकारों से वंचित है। असम में चाय बागान श्रमिकों को मात्र 250 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी मिलती है, जबकि अन्य राज्यों जैसे कर्नाटक में यह लगभग 600 रुपये प्रतिदिन है। उन्होंने आगे कहा कि चाय बागान श्रमिकों को आज भी भूमि अधिकार, सम्मानजनक आवास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। वर्षों से विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा इस समुदाय का केवल वोट बैंक के रूप में उपयोग किया गया है, परंतु उनके जीवन स्तर में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

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आदिवासी समाज केवल वोट बैंक 

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने आदिवासी समुदाय के साथ हो रहे लगातार शोषण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार हर बार आदिवासियों का केवल उपयोग करती है और काम निकल जाने के बाद उन्हें उनके हाल पर छोड़ देती है। आदिवासी समाज को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जबकि उन्हें उनके मूलभूत अधिकारों से वंचित रखा जाता है। अब समय परिवर्तन का है और आदिवासी समाज अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करेगा। जिस प्रकार झारखण्ड में हमारे पूर्वजों ने संघर्ष के बल पर राज्य हासिल किया, उसी प्रकार अब असम में भी अपने हक और सम्मान के लिए संघर्ष किया जाएगा।

सत्ता बदलना भी जानते हैं आदिवासी

आदिवासी समाज की शक्ति पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि आदिवासी कमजोर नहीं हैं, बल्कि वे सत्ता बनाना भी जानते हैं और जरूरत पड़ने पर सत्ता को बदलना भी जानते हैं। आदिवासी समाज अपने अधिकार लेकर रहेगा और इसके लिए निरंतर संघर्ष करेगा। अपने संबोधन में उन्होंने झारखण्ड के वीर शहीदों को नमन करते हुए कहा कि जिस प्रकार पूर्वजों ने तीर-धनुष के बल पर अपने अधिकारों की रक्षा की उसी मार्ग पर चलते हुए इस चुनाव में भी आदिवासी समाज अपनी ताकत का परिचय देगा। उन्होंने चाय बागान एवं आदिवासी समुदाय से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया तथा आगामी विधानसभा चुनाव में झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के प्रत्याशियों को विजयी बनाने की अपील की।

असम के सोनारी विधानसभा क्षेत्र में पार्टी प्रत्याशी बलदेव तेली के पक्ष में जनसभा को संबोधित करते हुए हेमन्त सोरेन ने कहा झारखण्ड की तरह यहाँ भी युवाओं को अवसर, मेहनतकशों को सम्मान और आदिवासी-स्थानीय समाज को उनका अधिकार मिलना चाहिए। विकास का मतलब केवल आंकड़े नहीं, बल्कि हर घर तक पहुँचती खुशहाली है। असम के सोनारी विधानसभा में असम की महान जनता को अब बदलाव चाहिए – ऐसा बदलाव जो सिर्फ़ वादों में नहीं, ज़मीनी हक़ीक़त में दिखे।

इस अवसर पर झारखण्ड सरकार के कई कैबिनेट मंत्री एवं पार्टी के वरिष्ठ विधायक भी उपस्थित रहे। जनसभा में हजारों की संख्या में चाय बागान श्रमिक, आदिवासी समुदाय के सदस्य एवं स्थानीय लोगों ने भाग लिया।

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एयर नाऊ स्पेशल

देश का एआई हब बनने की तैयारी कर रहा...

न्यूज़ डेस्क : झारखंड. ये नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? कोयला, लोहे की खदानें, मिनरल्स या शायद आदिवासी संस्कृति....
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