नई दिल्ली: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 6 यूक्रेनी और 1 अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया है। इन पर म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों को हथियार और आतंकवादी साजो-सामान उपलब्ध कराने के साथ भारत में उग्रवाद को समर्थन देने का आरोप है। इस मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है।
Highlights:
क्या है पूरा मामला
NIA के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी म्यांमार के जातीय युद्ध समूहों के संपर्क में थे और उन्हें हथियार, ट्रेनिंग तथा अन्य संसाधनों की मदद दे रहे थे। एजेंसी का दावा है कि ये लोग कुछ प्रतिबंधित भारतीय उग्रवादी संगठनों से भी जुड़े हुए थे। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैन डाइक के साथ 6 यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। इनके नाम हैं हुर्बा पेट्रो, स्लीव्याक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफानकिव मारियन, होनचारुक मैक्सिम और कामिंस्की विक्टर।
अलग-अलग शहरों से हुई गिरफ्तारी
NIA ने 13 मार्च को इस कार्रवाई को अंजाम देते हुए दिल्ली से तीन, लखनऊ से तीन और कोलकाता से एक आरोपी को गिरफ्तार किया। सभी के खिलाफ आतंकवादी षड्यंत्र (धारा 18) और BNS के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की सुनवाई के दौरान विशेष NIA न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने सभी आरोपियों को 11 दिन की NIA हिरासत में भेज दिया। हालांकि एजेंसी ने 15 दिन की रिमांड की मांग की थी। NIA का कहना है कि आरोपी AK-47 जैसे हथियार रखने वाले आतंकियों के संपर्क में थे।
NIA के गंभीर आरोप
NIA के अनुसार, ये आरोपी न केवल हथियारों की सप्लाई कर रहे थे, बल्कि आतंकवादी गतिविधियों के लिए प्रशिक्षण भी दे रहे थे। एजेंसी का दावा है कि इनकी गतिविधियां भारत और म्यांमार दोनों की सुरक्षा के लिए खतरा थीं। इस गिरफ्तारी पर यूक्रेन ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। भारत में यूक्रेन के राजदूत डॉ. ओलेक्जेंडर पोलिशचुक ने विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी सिबी जॉर्ज से मुलाकात कर आधिकारिक विरोध नोट सौंपा। इसमें गिरफ्तार यूक्रेनी नागरिकों की तत्काल रिहाई और उनसे मिलने की अनुमति देने की मांग की गई है।
अमेरिकी दूतावास की प्रतिक्रिया
अमेरिकी नागरिक की गिरफ्तारी को लेकर अमेरिकी दूतावास ने भी प्रतिक्रिया दी है। दूतावास ने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी है और वे स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने यह भी आरोप लगाया कि भारत ने उनके दूतावास को गिरफ्तारी की आधिकारिक सूचना नहीं दी, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है। उन्होंने हिरासत में लिए गए नागरिकों से मिलने की अनुमति देने की मांग दोहराई है।
यह भी पढ़ें: बंगाल में CM ने काटे 74 विधायकों के टिकट, ममता बनर्जी भबानीपुर से लड़ेंगी चुनाव
सबूतों पर अभी स्थिति साफ नहीं
अब तक ऐसा कोई ठोस सार्वजनिक सबूत सामने नहीं आया है जिससे यह पूरी तरह साबित हो सके कि आरोपी भारत या म्यांमार में गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल थे। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने के आरोप भी लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में कई ऐसे प्रतिबंधित क्षेत्र हैं जहां बिना अनुमति प्रवेश वर्जित होता है। कई बार इन क्षेत्रों की स्पष्ट मार्किंग नहीं होने के कारण विदेशी नागरिक अनजाने में नियमों का उल्लंघन कर बैठते हैं।


