नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फ्रीबीज यानी मुफ्त सुविधाओं के मुद्दे पर अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर सरकारें लोगों को सुबह से शाम तक मुफ्त खाना, गैस और बिजली देती रहेंगी तो लोग काम क्यों करेंगे। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की नीतियां देश के वर्क कल्चर को कमजोर कर सकती हैं और यह गंभीर चिंता का विषय है।
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सबको मुफ्त सुविधा नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद करना जरूरी है, लेकिन बिना किसी भेदभाव के सभी को मुफ्त सुविधा देना उचित नहीं है। कोर्ट ने यह टिप्पणी तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें सभी उपभोक्ताओं को उनकी आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना मुफ्त बिजली देने के प्रस्ताव को चुनौती दी गई है। सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि देश के कई राज्य पहले से ही राजस्व घाटे में चल रहे हैं, फिर भी विकास कार्यों को नजरअंदाज कर मुफ्त योजनाएं चलाई जा रही हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसी नीतियों के दीर्घकालिक प्रभावों पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है।
बिजली नियमों को दी गई चुनौती
तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन ने 2024 के विद्युत संशोधन नियमों के नियम 23 को चुनौती दी है। इस नियम में उपभोक्ताओं की आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना मुफ्त बिजली देने का प्रस्ताव है। राज्य सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को हर दो महीने में करीब 100 यूनिट तक मुफ्त बिजली देती है, जिसमें पहली 100 यूनिट का बिल नहीं लिया जाता।
केंद्र और अन्य पक्षों को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया है और पूछा है कि बिजली दरों की घोषणा के बाद अचानक मुफ्त बिजली देने का फैसला क्यों लिया गया। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई में विस्तृत जवाब मांगा है। फ्रीबीज कल्चर पर सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी देश में चल रही मुफ्त योजनाओं की बहस को फिर से तेज कर सकती है। अब इस मामले में कोर्ट के आगे आने वाले फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इससे राज्यों की नीतियों और वित्तीय प्रबंधन पर बड़ा असर पड़ सकता है।


