Wednesday, September 16, 2026

UGC बिल 2026 को लेकर यूपी और बिहार समेत देशभर में बवाल और प्रदर्शन

दिल्ली: UGC बिल 2026 को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। UP सहित बिहार की राजधानी पटना में स्टूडेंट यूनियन और स्वर्ण समाज एकता मंच के बैनर तले छात्रों और सामाजिक संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने इस कानून को काला कानून बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पोस्टर पर कालिख पोती और इसे तत्काल वापस लेने की मांग की। वहीं UGC कानून के विरोध में जोधपुर स्थित एक होटल में सवर्ण समाज की ओर से प्रेस वार्ता आयोजित की गई। प्रेस वार्ता में समाज के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया और सरकार से इस कानून को वापस लेने की मांग की। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस कानून पर पुनर्विचार नहीं किया, तो 1 फरवरी को जोधपुर बंद के साथ देशव्यापी भारत बंद किया जाएगा।

प्रदर्शनकारियों का आरोप

प्रदर्शन में शामिल उज्जवल कुमार ने कहा कि UGC बिल छात्रों के हित में नहीं है। उनका आरोप है कि सरकार एक तरफ समानता की बात कर रही है और दूसरी तरफ जातीय आधार पर समाज को बांटने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार वास्तव में समानता चाहती है तो ऐसे कानून क्यों ला रही है, जिससे छात्रों में असमानता बढ़े। प्रदर्शन के दौरान कुछ वक्ताओं ने तीखे बयान भी दिए। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर चक्काजाम किया जाएगा और सड़क पर उतरकर आंदोलन तेज किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि यह कानून सामान्य वर्ग के छात्रों को स्वाभाविक अपराधी की तरह पेश करता है और इससे कॉलेज व विश्वविद्यालयों में तनाव बढ़ सकता है।

UGC बिल को लेकर सियासी बयानबाजी तेज

UGC बिल 2026 को लेकर राजनीतिक दलों के बीच भी बयानबाजी तेज हो गई है। जहां कुछ संगठन इसका विरोध कर रहे हैं, वहीं कुछ दलों ने खुलकर इसका समर्थन किया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने UGC कानून 2026 का समर्थन किया है। पार्टी प्रवक्ता शक्ति यादव ने कहा कि यह कानून आरक्षित वर्गों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। इन्हीं शिकायतों पर बनी समिति की रिपोर्ट के आधार पर यह कानून लाया गया है।

तेज प्रताप यादव ने बताया ऐतिहासिक कदम

राजद नेता तेज प्रताप यादव ने UGC के नए नियमों को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार लाया गया प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026 कानून विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए जरूरी है। कांग्रेस ने UGC बिल को लेकर हो रही चर्चाओं को एकतरफा बताया है। पार्टी का कहना है कि यह समझना जरूरी है कि इस कानून का दुरुपयोग कैसे हो सकता है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि क्या अफवाहों के जरिए देश में अराजकता का माहौल बनाया जा रहा है।

UGC के नए नियमों का विरोध क्यों हो रहा है

UGC ने 13 जनवरी को अपने नए नियमों को नोटिफाई किया था, जिसका नाम है प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026। इसके तहत कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने का निर्देश दिया गया है। ये टीमें खासतौर पर SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों की निगरानी करेंगी। सरकार का कहना है कि इससे उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही आएगी। वहीं विरोध करने वालों का आरोप है कि इससे जनरल कैटेगरी के छात्रों के खिलाफ भेदभाव बढ़ेगा।आलोचकों का कहना है कि नए नियमों से सवर्ण छात्रों को स्वाभाविक अपराधी की तरह देखा जाएगा। उनका दावा है कि इससे कॉलेज और विश्वविद्यालय परिसरों में तनाव और अराजकता की स्थिति पैदा हो सकती है।

संसदीय समिति की सिफारिश

कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘इक्विटी कमेटी’ के गठन की सिफारिश की थी। इस समिति में लोकसभा और राज्यसभा के कुल 30 सांसद शामिल हैं, जिनमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सदस्य थे। UGC के नए नियमों को रोहित वेमुला और डॉ. पायल तड़वी जैसे मामलों से जोड़कर देखा जा रहा है। रोहित वेमुला हैदराबाद यूनिवर्सिटी के रिसर्च स्कॉलर थे, जिन्होंने 2016 में आत्महत्या की थी। आरोप था कि उन्हें जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा।

डॉ. पायल तड़वी मुंबई में मेडिकल की छात्रा थीं, जिन्होंने 2019 में आत्महत्या की। इस मामले में भी जातिगत उत्पीड़न के आरोप लगे थे। इन मामलों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को गंभीरता से लेने और सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए थे। UGC बिल 2026 को लेकर विरोध और समर्थन दोनों ही पक्षों में तीखी बहस जारी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और राजनीतिक रंग ले सकता है और देशभर में आंदोलन और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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एयर नाऊ स्पेशल

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