रांची: झारखंड में लंबे समय से लंबित नगर निकाय चुनाव को लेकर अब तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को नगर निकाय चुनाव की औपचारिक घोषणा कर दी। इसके साथ ही राज्य के 48 शहरी निकायों में चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह चुनाव कई मायनों में खास माने जा रहे हैं, क्योंकि ट्रिपल टेस्ट पूरा होने के बाद पहली बार नगर निकाय चुनाव कराए जा रहे हैं। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, झारखंड के सभी 48 नगर निकायों में 23 फरवरी (सोमवार) को एक ही दिन मतदान कराया जाएगा। मतदान सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक होगा। इसके बाद 27 फरवरी को मतगणना की जाएगी और नतीजे घोषित किए जाएंगे।
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नामांकन की तारीखें तय
चुनाव आयोग ने नामांकन और अन्य प्रक्रियाओं की पूरी समय-सारिणी भी जारी कर दी है। 29 जनवरी से 4 फरवरी तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे। 5 फरवरी को नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) होगी। 6 फरवरी को नाम वापस लेने की अंतिम तारीख और 7 फरवरी को उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाएंगे। इसके बाद सभी प्रत्याशी प्रचार अभियान में जुट जाएंगे। इस बार जिन 48 शहरी स्थानीय निकायों में चुनाव हो रहे हैं, उनमें 9 नगर निगम है। 20 नगर परिषद और 19 नगर पंचायत शामिल हैं। इन निकायों के जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल वर्ष 2020 में ही समाप्त हो चुका था, लेकिन विभिन्न कारणों से चुनाव नहीं हो पाए थे।
क्यों टलते रहे नगर निकाय चुनाव
दरअसल, झारखंड में नगर निकाय चुनाव वर्ष 2020 में होने थे, लेकिन उस समय कोरोना महामारी के कारण सरकार ने चुनाव स्थगित कर दिए थे। इसके बाद ओबीसी आरक्षण और ट्रिपल टेस्ट को लेकर लंबे समय तक निर्णय नहीं हो सका। मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा, जहां से समय-सीमा तय की गई। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रक्रिया को आगे बढ़ाया, जिसके परिणामस्वरूप अब चुनाव की घोषणा संभव हो पाई।
ट्रिपल टेस्ट के बाद पहला चुनाव
यह नगर निकाय चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ट्रिपल टेस्ट प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य में पहली बार शहरी निकाय चुनाव कराए जा रहे हैं। इससे ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रहे विवाद पर भी विराम लगा है और चुनाव संवैधानिक रूप से मजबूत आधार पर कराए जा रहे हैं। नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत शहरों के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। इन निकायों के जरिए सड़क और नाली निर्माण, पेयजल आपूर्ति, स्वच्छता व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, शहरी आधारभूत ढांचे का विकास जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जाते हैं। ऐसे में इन चुनावों से चुने जाने वाले जनप्रतिनिधि आने वाले वर्षों में शहरों की दिशा और दशा तय करेंगे।
राजनीतिक दलों की बढ़ी सक्रियता
नगर निकाय चुनावों को लेकर सभी प्रमुख राजनीतिक दल पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं। माना जा रहा है कि इन चुनावों के नतीजे आने वाले बड़े राजनीतिक मुकाबलों की दिशा भी तय कर सकते हैं। यही कारण है कि दल अभी से रणनीति बनाने, उम्मीदवार चयन और संगठन को मजबूत करने में जुट गए हैं। राज्यपाल द्वारा विधानसभा के बजट सत्र के कार्यक्रम को मंजूरी दिए जाने के बाद सरकार और चुनाव आयोग दोनों के लिए आगे की कार्यवाही का रास्ता साफ हो गया है। अब आने वाले दिनों में चुनावी सरगर्मी तेज होने की पूरी संभावना है. करीब चार साल के इंतजार के बाद झारखंड में नगर निकाय चुनाव की घोषणा से शहरी क्षेत्रों में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। 23 फरवरी को होने वाला मतदान और 27 फरवरी को आने वाले नतीजे न सिर्फ स्थानीय निकायों की तस्वीर बदलेंगे, बल्कि राज्य की राजनीति को भी नई दिशा देने वाले साबित हो सकते हैं।


