Monday, November 2, 2026

भोजशाला पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: बसंत पंचमी पर पूजा-नमाज़ के लिए अलग-अलग समय निर्धारित

भोजशाला: मध्य प्रदेश के धार भोजशाला को लेकर लंबे समय से विवाद चलता आ रहा है। इस बार यह विवाद 23 जनवरी को आने वाली बसंत पंचमी के अवसर पर सरस्वती पूजा और शुक्रवार की जुमा नमाज़ को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। आज सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने पूजा और नमाज़ के लिए अलग-अलग समय तय करने का आदेश दिया है।

विवाद का कारण

भोजशाला को एक ओर हिंदू समुदाय सरस्वती माता का मंदिर मानता है, वहीं मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद कहते हुए जुमा की नमाज़ अदा करता रहा है। इस ऐतिहासिक परिसर पर दोनों समुदायों के धार्मिक अधिकार और समय को लेकर कई सालों से विवाद है। इस बार मामला इसलिए तूल पकड़ा क्योंकि 23 जनवरी को बसंत पंचमी और शुक्रवार दोनों एक ही दिन पड़ रहे हैं, जिस पर हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि इस दिन पूरे दिन हिंदुओं को पूजा का विशेष अधिकार दिया जाए और नमाज़ को रोका जाए।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुना और बसंत पंचमी के दिन यहां पूजा और नमाज़ के लिए अलग-अलग समय निर्धारित कर दिए हैं। दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक मुस्लिम समुदाय को जुमा की नमाज़ पढ़ने की अनुमति दी गई है।  इससे पहले और बाद में हिन्दू समुदाय को सरस्वती पूजा के लिए समय मिलेगा। न्यायालय ने यह व्यवस्था दोनों समुदायों की धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए की है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि स्थल को साझा उपयोग के लिए सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, और प्रवेश-निकास तथा बैरिकेडिंग आदि के उचित इंतजाम किए जाएं।

प्रशासन की तैयारी

भोजशाला विवाद की संवेदनशीलता को देखते हुए धार जिला प्रशासन ने सुरक्षा कड़ी कर दी है। शहर और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त पुलिस और अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है ताकि शांति और सुव्यवस्था बनी रहे। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि बसंत पंचमी के दिन दोनों धार्मिक समारोह बिना किसी टकराव के संपन्न हों।

दोनों समुदायों की प्रतिक्रिया

समय-समय पर नेताओं और समाजसेवियों ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है। कुछ वरिष्ठ नेताओं ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पहले से जारी नियमों का पालन करने की भी बात कही है ताकि इस विवाद के बीच भी सामाजिक संतुलन बना रहे। इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से बसंत पंचमी पर भोजशाला में पूजा और नमाज़ दोनों के लिए अलग-अलग समय तय हो गया है, जिससे विवादित स्थल पर शांति-पूर्ण तरीके से दोनों समुदायों को पूजा-अर्चना और नमाज़ पढ़ने का मौका मिलेगा।

एयर नाऊ स्पेशल

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