मध्यप्रदेश : रविवार को भोपाल के भेल दशहरा मैदान में एससी, एसटी और ओबीसी संगठनों के संयुक्त मोर्चा का एक बड़ा सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों से करीब दस हजार लोग शामिल हुए। लेकिन यह कार्यक्रम अपनी मांगों से ज्यादा मंच से दिए गए आपत्तिजनक बयानों के कारण विवादों में आ गया। कई नेताओं ने न केवल सरकार बल्कि प्रमुख संतों और कथावाचकों पर भी तीखी और अमर्यादित टिप्पणियां कीं।
सम्मेलन का मुख्य मुद्दा आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की मांग थी, जिन पर ब्राह्मण बेटियों को लेकर अभद्र टिप्पणी करने का आरोप है। नेताओं का कहना था कि सरकार ने अब तक उनके खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया है, जो न्याय के साथ खिलवाड़ है। इसी बीच मंच से प्रसिद्ध कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य पर भी व्यक्तिगत हमले किए गए।
छतरपुर के पूर्व भाजपा विधायक आरडी प्रजापति ने रामभद्राचार्य के एक पुराने बयान का हवाला देते हुए उन पर आपत्तिजनक टिप्पणी की और कहा कि संतों को भी जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़े तो उन्हें फांसी दे दी जाए, लेकिन पहले ऐसे बाबाओं पर कार्रवाई होनी चाहिए।
दलित पिछड़ा समाज संगठन के संस्थापक दामोदर यादव ने भी धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर कटाक्ष करते हुए उन्हें “पाखंड की दुकान” बताया और उनके चमत्कारों पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि धर्म के नाम पर लोगों को गुमराह किया जा रहा है। सम्मेलन में आरक्षण और भर्ती से जुड़े मुद्दे भी जोर-शोर से उठाए गए। नेताओं ने मांग की कि प्रदेश में एससी, एसटी और ओबीसी के तीन लाख बैकलॉग पदों पर तुरंत भर्ती की जाए, ओबीसी के 13 प्रतिशत रोके गए पदों को बहाल किया जाए और ओबीसी को 52 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए।
कार्यक्रम में भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन, जयस के राष्ट्रीय अध्यक्ष लोकेश मुजाल्दा और अन्य सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। हाल ही में कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया के विवादित बयान का भी जिक्र किया गया, जिसमें उन्होंने यौन हिंसा की घटनाओं को धर्मग्रंथों से जोड़ दिया था।


