राँची(धुर्वा): राजधानी रांची का एचईसी (HEC) औद्योगिक क्षेत्र और आसपास के इलाके कल यानी रविवार को पूरी तरह बंद रहेगा। दरअसल 5 वर्षीय अंश और 4 वर्षीय अंशिका के गायब होने की घटना को 9 दिन बीत चुके हैं, लेकिन तमाम हतकंडे और कवायद के बाद भी पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। इसी विफलता के खिलाफ जनता का गुस्सा अब ‘जनांदोलन’ में बदल चुका है। इसको लेकर शनिवार शाम ‘अंश-अंशिका बचाओ संघर्ष समिति’ के बैनर तले भारी संख्या में लोगों ने हाथों में मशालें लेकर सड़कों पर मार्च किया और प्रशासन को दो-टूक चेतावनी दी कि यदि बच्चे सुरक्षित वापस नहीं आए, तो आंदोलन और उग्र होगा।
Highlights:
मशाल जुलूस: मौसीबाड़ी से बिरसा चौक तक गूंजी न्याय की मांग
राजद नेता और संघर्ष समिति के संयोजक कैलाश यादव के नेतृत्व में निकाला गया यह मशाल जुलूस मौसीबाड़ी खटाल से शुरू हुआ। हजारों की संख्या में महिला-पुरुष और युवा झोपड़ी मार्केट, सेक्टर-2 और पुराने विधानसभा होते हुए बिरसा चौक पहुँचे। भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा के समक्ष सभा कर लोगों ने अपनी पीड़ा और आक्रोश जाहिर किया। कैलाश यादव ने कहा कि “आज 9वां दिन है, लेकिन प्रशासन के पास कोई ठोस जानकारी नहीं है। 2 जनवरी से दो मासूम गायब हैं और धुर्वा पुलिस केवल आश्वासन दे रही है। अब यह केवल एक परिवार की लड़ाई नहीं, बल्कि पूरे समाज का जनांदोलन है।” साथ ही कहा कि भगवान जगन्नाथ से बच्चों की सकुशल वापसी की प्रार्थना करते हुए कहा कि प्रशासन की सुस्ती ने लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया है।
11 जनवरी को बंदी का ऐलान
संघर्ष समिति ने कल रविवार को संपूर्ण एचईसी औद्योगिक क्षेत्र और आसपास के इलाकों को पूर्ण रूप से बंद रखने का आह्वान किया है। जिसके तहत इलाके के बाजार, हाट-दुकानें, ऑटो, निजी गाड़ियाँ और चप्पे-चप्पे पर व्यावसायिक गतिविधियाँ पूरी तरह ठप रहेंगी। वहीं रविवार सुबह 10 बजे सेक्टर-2 पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास परिजन, समाज के लोग और समिति सदस्य एकत्रित होंगे और शांति मार्च निकालते हुए पुराना ओपीडी गोलचक्कर पहुँचेंगे। आंदोलन को व्यवस्थित रखने और चप्पे-चप्पे पर बंद का असर सुनिश्चित करने के लिए धुर्वा, जगन्नाथपुर और धुर्वा सेक्टर-2 के लिए 3 विशेष टीमें गठित की गई हैं।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
विगत 2 जनवरी की दोपहर 2:30 बजे से गायब अंश और अंशिका के माता-पिता की आँखों के आँसू सूख चुके हैं। घर में मायूसी और तनाव का माहौल है। वहीं बच्चों के गायब होने के बाद से ही माँ ने अन्न लेना बंद कर दिया है। जिसके बाद से घर में चूल्हा भी नहीं जल रहा है।
रविवार का बंद मासूमों का पता लगाने में विफल प्रशासन के लिए एक बड़ा अल्टीमेटम है। शहर के तमाम सामाजिक संगठनों ने भी इस बंद को अपना नैतिक समर्थन दिया है।


